जिसके टर्म्स अच्छे नहीं, वह अच्छा पत्रकार नहीं
makhnlal

 

माखनलाल चतुर्वेदी वि.वि. के कार्यक्रम में जयभान सिंह 

 

 

 

उच्च शिक्षा मंत्री  जयभान सिंह पवैया ने कहा है कि विद्यार्थी को स्वाध्यायी बनना चाहिये। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी को पाठ्यक्रम से हटकर अतिरिक्त ज्ञान स्वाध्यायी होने से ही प्राप्त होता है। श्री पवैया ने यह बात माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के 'सत्रारंभ-2016'' के समापन समारोह में कही। उन्होंने कहा कि स्वाध्यायी का आधार मजबूत होता है।

 

श्री जयभान सिंह पवैया ने कहा कि पत्रकारिता में एक लोकेषणा और धमक होती है। इसमें जल्द ख्याति प्राप्त होती है और फिसलने की गुंजाइश। पत्रकार वह है जो दूसरे को हीरो बनाने का काम करता है। पत्रकारिता के विद्यार्थियों में सूक्ष्म अहंकार भी हो सकता है। इससे उसके पब्लिक से रिलेशन कमजोर होते हैं और जिसके टर्म्स अच्छे नहीं, वह अच्छा पत्रकार नहीं।

 

उच्च शिक्षा मंत्री श्री पवैया ने कहा कि इंसान कुछ बन जाने के बाद त्याग और समर्पण से ही देश को कुछ दे सकता है। राष्ट्र की सेवा के लिये भारत-माता का कर्ज उतारने के लिये काम करना होगा। उन्होंने कहा कि इंसान अपने वातावरण में मौजूद कण-कण का ऋणी है, जिसका कर्ज उसे उतारना होगा। श्री पवैया ने कहा कि राष्ट्र के लिये समर्पण और प्रतिबद्धता से हम भारत-माता के रत्न बन जाते हैं। दरिद्रनारायण की सेवा का संकल्प ही हमें आगे बढ़ाता है।

 

श्री पवैया ने विश्वविद्यालय के कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि सत्र आरंभ में ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिये प्रेरणा का काम करते हैं। उन्होंने भी इस संबंध में निर्देश दिये हैं। श्री पवैया ने कहा कि लोगों ने जाना है कि पत्रकार और मीडिया देशहित के लिये जरूरी हैं। किसी संविधान में नहीं लिखा है कि पत्रकारिता चौथा स्तंभ है, लेकिन पत्रकारिता अपने कार्यों से विधान मण्डल का चौथा स्तंभ बन गयी है।

 

श्री पवैया ने विद्यार्थियों को त्याग और समर्पण की भावना से काम करने को कहा। उन्होंने साधु और शादी होकर जा रही बिटिया का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके त्याग से कई लोग ऋणी हो जाते हैं। साधु के त्यागे हुए हिस्से का भोग हम करते हैं और ब्याही बेटी द्वारा छोड़ी गयी सम्पत्ति पर उसके भाई का अधिकार होता है, इसलिये वह पूजनीय है।

 

उच्च शिक्षा मंत्री श्री पवैया ने कहा कि आज के समय में लोगों में पढ़ने की आदत कम हुई है। सोशल मीडिया, मोबाइल आदि से उतना ज्ञान नहीं होता, जितना किसी ग्रंथ और साहित्य के पढ़ने से। उन्होंने विद्यार्थियों को चेताया भी कि किसी खबर में अपनी भड़ास निकालने से किसी व्यक्ति विशेष का सार्वजनिक जीवन बर्बाद हो जाता है, जिसका फिर कितना भी खण्डन करते रहो, उसका कोई असर नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता एक पवित्र पेशा है, इसके लिये बड़ी सोच रखना जरूरी है। श्री पवैया ने कहा कि आपको अपनी कलम से भारत-माता की सेवा करने का काम मिला है। अच्छा काम करने से आप भारत-माता के सच्चे सपूत साबित होंगे।

 

कार्यक्रम को कुलपति प्रो. ब्रजकिशोर कुठियाला ने भी संबोधित किया। कुलसचिव एवं रजिस्ट्रार  दीपक शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया। रेक्टर  लाजपत आहूजा ने आभार माना।

Dakhal News 30 July 2016

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