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विज्ञापन नीति का मामला राज्यसभा में,रोक की माँग
राज्यसभा में शिवसेना के उपनेता चंद्रकांत खैरेे ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की प्रिंट मीडिया विज्ञापन नीति 2016 का मामला राज्यसभा में उठाया।
उन्होंने कहा कि डीएवीपी ने जो नीति लागू की है, उसमें जो शर्तेंऔर अंकव्यवस्था लागू की है।उन्हें लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों द्वारा पूरा किया जाना संभव ही नहीं है।इस विज्ञापन नीति से भाषाई समाचार पत्र जिसमें हिंदी तमिल तेलुगू कन्नड़ मराठी गुजराती सहित भाषायी 95 फीसदी लघु एवं मध्यम समाचार पत्र बंद होने की स्थिति में पहुंच गए हैं।
सांसद खेरे ने राज्य सभा में नियम 377 के अधीन सूचना के द्वारा राज्य सभा में यह मसला उठाते हुए कहा कि औद्योगिक घरानों की मीडिया कंपनियों को फायदा पहुंचाने तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को समाप्त करने का सुनियोजित प्रयास किया जा रहा है।उन्होंने सरकार से इस विज्ञापन नीति को संशोधित करने की मांग की। लघु एवं मध्यम वर्ग के समाचार पत्रों के अनुकूल विज्ञापन नीति बनवाने की दिशा में सरकार निर्णय करें। इस विज्ञापन नीति 2016 का क्रियान्वयन तत्काल रोका जाए।
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