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अवधेश बजाज
रोजाना प्रमाणिक और सकारात्मक पत्रकारिता का दम्भ भरने वाले देश के सबसे बड़े समाचार पत्र ने देश के सबसे प्रतिभावान चरित्र अभिनेता और अर्ध्द सत्य के नायक ओम पुरी की स्वाभाविक और नैसर्गिक मृत्यु को जिस तरह से आज (शनिवार) अपने प्रथम पृष्ठ पर रहस्य मौत बनाकर प्रकाशित किया है और उनकी मृत्यु पर जो तथ्य पेश कर सवाल उठाए हैं, वह घटिया पत्रकारिता का नायाब नमूना है।
पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में उनके सिर में ड़ेढ़ इंच गहरा घाव निकला है। तथा एक्सीडेंटल डेथ माना है। ऐसे में अखबार द्वारा ओमपुरी की दूसरी पत्नी नंदिता के आरोप और प्रोड्यूसर खालिद किदवयी के कथन के आधार पर ओमपुरी की स्वाभाविक मृत्यु को रहस्यमयी बनाकर पेश करना और उनकी मौत पर सवाल उठाना अत्यंत शर्मनाक है। ओमपुरी मेरे पारिवारिक मित्र थे। तथा उनका मेरे घर आना-जाना था। वे जेहनी रिश्तों को जीने वाले इंसान थे। अखबार ने जिस तरह से ओमपुरी की मृत्यु की खबर को पेश किया है, वह एक तरह से पारिवारिक जेहनी रिश्तों को सनसनीखेज भरा और खबर को बिकाऊ बनाने की कोशिश है। यह रोजाना नो-नेगेटिव न्यूज की बात करने वाले और देश के सबसे बड़े समाचार पत्र की खुजलीभरी पत्रकारिता का परिचायक भी है। इस तरह की पत्रकारिता जितनी भर्त्सना की जाए उतनी कम है।[ वरिष्ठ पत्रकार अवधेश बजाज की वॉल से ]
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