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भोपाल ISBT बस अग्निकांड की फॉरेंसिक जांच में कई अहम तथ्य सामने आए हैं। जांच के दौरान वर्मा ट्रेवल्स की उस बस के डीजल टैंक का ढक्कन गायब मिला, जिसमें सबसे पहले आग लगी थी। टैंक को फोम के टुकड़ों से बंद करने की कोशिश की गई थी। इसके अलावा बस के पीछे वाली डिक्की के नीचे मिट्टी और गाड़ी की बॉडी पर ज्वलनशील पदार्थ जैसी गंध दर्ज की गई। फॉरेंसिक टीम ने जले हुए अवशेष और कार्बन के नमूने एकत्र कर जांच के लिए सागर स्थित फॉरेंसिक लैब भेजे हैं।
डीजल टैंक का ढक्कन गायब मिलने के बाद वर्मा ट्रेवल्स के सर्विस सुपरवाइजर रईस खान, इलेक्ट्रीशियन और मैनेजर से पूछताछ की गई। हालांकि, कर्मचारी यह स्पष्ट नहीं कर सके कि डीजल टैंक को फोम के टुकड़ों से क्यों बंद किया गया था। कुछ कर्मचारियों ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताते हुए कहा कि कई गाड़ियों में ढक्कन नहीं होते और गैस बनने से रोकने के लिए टैंक को पैकेजिंग सामग्री से सील किया जाता है। जांच टीम ने इग्निशन स्विच और गाड़ी की मुख्य चाबी निकालने के बाद भी इलेक्ट्रिक सप्लाई जारी रहने की संभावना को लेकर सवाल किए। इस दौरान इलेक्ट्रीशियन के जवाब के बीच अन्य कर्मचारियों द्वारा इशारे करने की कोशिश पर फॉरेंसिक टीम के प्रमुख ने उन्हें फटकार लगाई। सुपरवाइजर रईस खान ने बताया कि घटना वाली शाम वह नादरा बस स्टैंड पर था।
गोविंदपुरा थाना प्रभारी अवधेश तोमर के मुताबिक, वर्मा ट्रेवल्स के संचालक दीपक वर्मा की लिखित शिकायत पर बसों में आग लगने के मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस और फॉरेंसिक टीम घटना के कारणों का पता लगाने के लिए आगे की जांच कर रही हैं। डीजल टैंक का ढक्कन गायब होने और ज्वलनशील पदार्थ जैसी गंध मिलने से जुड़े तथ्यों की जांच रिपोर्ट आने के बाद आग लगने की वजह को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
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