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अखिलेश यादव ने प्रदर्शन को रोकने की कोशिशों और पुलिस की भारी तैनाती को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार है। किसी भी सरकार को यह अधिकार छीनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन रोक देने से विपक्ष की आवाज बंद नहीं होगी। उन्होंने कहा कि लोग जहां भी बैठकर अपनी बात रखेंगे, वही जगह उनके लिए जंतर-मंतर बन जाएगी। उनके मुताबिक, प्रदर्शन की जगह बदलने से आंदोलन का उद्देश्य खत्म नहीं हो जाता।
अखिलेश यादव ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस की भारी मौजूदगी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कमजोर लोग पुलिस को आगे करते हैं और आरोप लगाया कि सरकार विरोध की आवाज को दबाने के लिए पुलिस का सहारा ले रही है। सपा प्रमुख ने कहा कि अगर लोकतंत्र में लोगों को अपनी समस्याएं उठाने और सरकार से सवाल पूछने की आजादी नहीं होगी, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था का उद्देश्य ही प्रभावित होगा। उन्होंने विपक्ष के संघर्ष को लोकतंत्र बचाने की लड़ाई बताते हुए कहा कि सरकार को प्रदर्शनकारियों की बात सुननी चाहिए और उनकी शिकायतों पर ध्यान देना चाहिए। अखिलेश यादव ने भाजपा को सत्ता से बाहर करने की बात भी कही। उनके इन बयानों से मतदाता सूची के मुद्दे पर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
दरअसल, पूरा विवाद मतदाता सूची की जांच प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के आरोपों से जुड़ा है। विपक्षी दलों का दावा है कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इसी को लेकर इंडिया गठबंधन के नेता चुनाव आयोग से जवाब मांग रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। विपक्ष इस मामले को लेकर राजनीतिक विरोध के साथ कानूनी रास्ता अपनाने की बात भी कर रहा है। वहीं, अखिलेश यादव ने साफ किया कि प्रदर्शन की जगह या परिस्थितियां बदलने से विपक्ष का संघर्ष नहीं रुकेगा। दूसरी ओर, मतदाता सूची में गड़बड़ी और नाम हटाए जाने से जुड़े आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित पक्षों का जवाब और उपलब्ध तथ्यों की जांच भी जरूरी है।
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