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कनाडाई लेखिका और कवयित्री ऐन कार्सन को 2026 के साहित्य नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। नोबेल समिति के मुताबिक, कार्सन ने अपनी रचनाओं के जरिए प्राचीन यूनानी-रोमन साहित्य और मिथकों को आधुनिक जीवन के अनुभवों से जोड़ा है। उनकी लेखन शैली में कविता, कथा और निबंध के बीच की सीमाएं अक्सर दिखाई नहीं देतीं। 1950 में टोरंटो में जन्मीं कार्सन ने प्राचीन यूनानी और रोमन साहित्य का अध्ययन किया और इसी विषय में 1981 में अपनी डॉक्टरेट की थीसिस प्रकाशित की। उनकी चर्चित कृतियों में ‘ऑटोबायोग्राफी ऑफ रेड: ए नॉवेल इन वर्स’ भी शामिल है, जिसमें उन्होंने एक प्राचीन यूनानी मिथक को प्रेम, रिश्तों और हिंसा जैसे मानवीय पहलुओं के साथ नए अंदाज में पेश किया।
कार्सन की अन्य चर्चित पुस्तकों में ‘नॉक्स’ और ‘द ब्यूटी ऑफ द हसबैंड’ शामिल हैं। ‘नॉक्स’ उन्होंने अपने भाई माइकल की स्मृति में लिखी थी, जिनका 2000 में डेनमार्क में निधन हुआ था। वहीं 2001 में प्रकाशित ‘द ब्यूटी ऑफ द हसबैंड’ में विवाह, विश्वासघात और रिश्ते के टूटने की कहानी को 29 हिस्सों में प्रस्तुत किया गया है। कार्सन की खासियत यह मानी जाती है कि वह पुराने साहित्यिक संदर्भों को जस का तस दोहराने के बजाय उनमें समकालीन भावनाओं और अपने रचनात्मक दृष्टिकोण को शामिल करती हैं। यही प्रयोगधर्मिता उनके लेखन को अलग पहचान देती है।
पिछले एक दशक में साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित लेखकों में महिलाओं की हिस्सेदारी भी उल्लेखनीय रही है। इस अवधि में 10 विजेताओं में 5 महिलाएं शामिल रहीं, जबकि 2024 में दक्षिण कोरिया की हान कांग को यह सम्मान मिला था। साहित्य के नोबेल के लिए नामांकन प्रक्रिया लंबे समय तक गोपनीय रहती है और नामांकित लेखकों की जानकारी 50 साल बाद सार्वजनिक की जाती है। प्रक्रिया में शुरुआती स्तर पर बड़ी संख्या में नामों पर विचार होता है, जिन्हें बाद में सीमित कर अंतिम उम्मीदवारों तक पहुंचाया जाता है। स्वीडिश अकादमी के 18 सदस्य मतदान के जरिए विजेता का चयन करते हैं। नोबेल रिकॉर्ड के अनुसार, भारत से भी सर्वपल्ली राधाकृष्णन, श्री अरविंद, ताराशंकर बंद्योपाध्याय और आर.के. नारायण जैसे साहित्यकारों के नाम अलग-अलग वर्षों में नामांकन सूची में रहे हैं।
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