तमिलनाडु के राज्यपाल की भूमिका पर उठे सवाल
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तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि के विधानसभा में पारंपरिक अभिभाषण दिए बिना सदन से बाहर निकलने को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि राज्य लोकतांत्रिक संस्थानों के कमजोर होने को स्वीकार नहीं करेगा और राज्यपाल को अपने संवैधानिक पद का दुरुपयोग बंद करना चाहिए। उन्होंने इसे विधानसभा और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का खुला उल्लंघन बताया।

 

मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने भी राज्यपाल के व्यवहार को परंपरा और नैतिकता के खिलाफ बताया। राज्यपाल के सदन से बाहर चले जाने के बाद डीएमके सरकार ने आरोप लगाए और विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित कर यह तय किया कि राज्यपाल के अभिभाषण के अंग्रेजी संस्करण को पढ़ा हुआ माना जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम संविधान के अनुरूप और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बनाए रखने के लिए जरूरी था।

 

मणिक्कम टैगोर ने राज्य सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 163 के तहत राज्यपाल को चुनी हुई सरकार की सलाह पर ही कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि निजी राय थोपना, भाषण में मनमाने बदलाव करना या विधेयकों की मंजूरी रोकना संवैधानिक विवेक नहीं बल्कि संवैधानिक अवज्ञा है। टैगोर ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए जोर दिया कि राज्यपालों को निष्पक्षता और संवैधानिक नैतिकता के साथ काम करना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत।

Priyanshi Chaturvedi 20 January 2026

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