Patrakar Priyanshi Chaturvedi
इंदौर में दूषित पानी से 17 मौतों और 1,400 से अधिक लोगों में बैक्टीरिया पाए जाने के बाद मध्य प्रदेश के जल स्त्रोतों की स्थिति गंभीर हो गई है। राज्य की 211 नदियों और 353 तालाबों/भूजल स्रोतों में प्रदूषण पाया गया है। औद्योगिक कचरा और रसायनयुक्त पानी सीधे नदियों और जलाशयों में छोड़े जाने से नदी-तालाबों का इको सिस्टम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। यह स्थिति न केवल लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि प्रदेश के पेयजल और कृषि संसाधनों पर भी असर डाल रही है।
प्रदेश में 2,515 लाल कैटेगरी के उद्योग, 1,398 नारंगी कैटेगरी के उद्योग और 2,048 हरे कैटेगरी के उद्योग बिना सीसीए (Consolidated Consent & Authorization) नवीनीकरण कराए चल रहे हैं। ये उद्योग अनियंत्रित अपशिष्ट नदियों में छोड़ रहे हैं, जिससे जल प्रदूषण और इको सिस्टम का विनाश हो रहा है। अधिकांश उद्योगों ने प्रदूषित जल के उपचार के कोई उपाय नहीं किए, जिससे नदी-तालाबों में जहरीला पानी बह रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदेश के जल और पर्यावरण संकट और गंभीर हो सकते हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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