सुधांशु त्रिवेदी ने संसद में उठाया भूला हुआ इतिहास
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राज्यसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने 1952 के पहले आम चुनाव से जुड़ा एक ऐसा प्रसंग उठाया, जिसने सियासी हलचल तेज कर दी। उन्होंने दावा किया कि बॉम्बे नॉर्थ सीट से डॉ. भीमराव अंबेडकर की हार के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने एडविना माउंटबेटन को एक पत्र लिखकर कहा था—“बॉम्बे निर्वाचन क्षेत्र में हमारी जीत स्वीकार कर ली गई है और अंबेडकर ड्रॉप हो गए।त्रिवेदी के मुताबिक नेहरू ने इस पत्र में यह भी लिखा कि अंबेडकर हिंदू कम्युनिस्टोंके साथ हाथ मिला रहे हैं। त्रिवेदी ने इसे कांग्रेस नेतृत्व की उस समय अंबेडकर प्रति सोच का संकेत बताया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि देश की पहली चुनाव याचिका भी खुद अंबेडकर ने अपनी हार पर संदेह जताते हुए दायर की थी।

 

त्रिवेदी ने आगे कहा कि 1952 में अंबेडकर को कांग्रेस उम्मीदवार नारायण काजोलकर ने हराया था, जिसमें कथित तौर पर 34,000 वोट रद्द हुए और अंबेडकर लगभग 15,000 वोटों से हार गए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर क्यों एक संवैधानिक दिग्गज की हार पर उस समय इतनी सहज प्रतिक्रिया दिखाई गई। इस बहाने उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधा कि जो आज संविधान बचाने की बात करती है, वही अतीत में संविधान निर्माता के प्रति न्यायपूर्ण नहीं रही।

 

चर्चा को आगे बढ़ाते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने भारत के लोकतंत्र की मजबूती पर वैश्विक तुलना भी रखी। उन्होंने कहा कि पूर्वी यूरोप से जापान तक केवल तीन ही वास्तविक लोकतंत्र हैंभारत, ऑस्ट्रेलिया और जापानजिनमें सबसे जीवंत लोकतंत्र भारत है। ईवीएम, वोटर आईडी, सीसीटीवी जैसी व्यवस्थाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पारदर्शिता बढ़ने के साथ कांग्रेस का राजनीतिक वर्चस्व घटा, क्योंकि बूथ कैप्चरिंग, मतपेटी लूट और हिंसा वाला दौर अब हमेशा के लिए इतिहास बन चुका है। उन्होंने कहा कि तकनीक, जागरूकता और निष्पक्ष संस्थानों ने लोकतंत्र को मजबूत किया और यही कांग्रेस के पतन की असली वजह बनी, न कि कोई मशीन।

 

Priyanshi Chaturvedi 11 December 2025

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