Patrakar Priyanshi Chaturvedi
लोकसभा में मंगलवार को चुनाव सुधार (SIR) पर हुई चर्चा में राहुल गांधी ने 28 मिनट का संबोधन दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि RSS और BJP देश की प्रमुख संस्थाओं—चुनाव आयोग, ED, CBI, IB और इनकम टैक्स—पर कब्जा कर रही हैं। राहुल ने कहा कि इससे स्पष्ट है कि भाजपा चुनाव आयोग को नियंत्रित कर रही है, जिससे लोकतंत्र को नुकसान हो रहा है। उनके भाषण के दौरान पांच बार हंगामा हुआ। हरियाणा की वोटर लिस्ट में ब्राजीलियन मॉडल का जिक्र आने पर कांग्रेस सांसदों द्वारा मॉडल की तस्वीर दिखाए जाने पर स्पीकर ओम बिरला ने नाराजगी जताई। राहुल ने SIR पर तीन मांगें रखीं—मशीन रीडेबल वोटर लिस्ट चुनाव से एक माह पहले मिले, CCTV फुटेज डिलीट करने का नियम बदले, और चुनाव के बाद EVM जांच के लिए उपलब्ध कराई जाए। साथ ही उन्होंने तीन सवाल भी पूछे—CJI को नियुक्ति पैनल से क्यों हटाया गया, चुनाव आयुक्त को दंडमुक्ति देने वाला कानून क्यों लाया गया और 45 दिन बाद CCTV फुटेज क्यों डिलीट किए गए?
राहुल के बाद विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी SIR पर सरकार को घेरा। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार और चुनाव आयोग SIR के बहाने भीतर ही भीतर NRC जैसा अभियान चला रहे हैं और यूपी में डिटेंशन सेंटर इसकी तैयारी का सबूत हैं। TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि SIR अब वोट डिलीट करने का टूल बन गया है, जबकि चुनाव आयोग नागरिकता तय करने की संस्था नहीं है। कांग्रेस के मनीष तिवारी ने SIR को 12 राज्यों में लागू करना गैरकानूनी बताया और इसे तत्काल रोकने की मांग की। उन्होंने चुनावों से पहले डायरेक्ट कैश ट्रांसफर पर रोक और EVM की जगह बैलेट पेपर से मतदान की वकालत भी की।
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