Patrakar Priyanshi Chaturvedi
लोग नदी नालों से प्यास बुझाने को मजबूर
सरकारे भले ही विकास के तमाम दावे कर लें। लेकिन सच्चाई तो यूँ है की जनता की बिजली पानी,सड़क जैसी मूलभूत जरूरतें ही पूरी नहीं हो पा रही है। जनता आज भी नदी नालों से प्यास बुझाने और जिल्लतभरी जिंदगी जीने को मजबूर है। डिंडौरी जिले में दिनोंदिन जल संकट गहराता ही जा रहा है। ग्रामीण आदिवासी नदी नालों का दूषित पानी पीकर प्यास बुझाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने स्थानीय से लेकर जिला स्तर तक तमाम अधिकारियों से शिकायत कर ली। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जानकर भी अंजान बने बैठे हैं। सभी नल जल योजना ठप्प पड़ी है। ग्रामीण छत्तीसगढ़ बॉर्डर के गांव जाकर नदी नालों का दूषित पानी पीकर प्यास बुझा रहे है और ताज्जुब की बात तो यह है की इस साल भीषण गर्मी पड़ने के बाद भी पानी का परिवहन भी नही कराया गया। जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वही डॉक्टर का कहना है की झिरिया और नदी नालों के दूषित पानी के पीने से लोगों को गम्भीर बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है।
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