Patrakar Priyanshi Chaturvedi
मंदसौर। आठ मई को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान ने भारत के सबसे भारी महाघंटा का लोकार्पण किया था, हालांकि लोकार्पण के चार दिन बाद ही घटिया निर्माण सामने आने लगा है। दूसरे ही दिन दोलन गायब हो गया तो लेप भी निकलने लगा है। सामाजिक संस्था ने एक अभियान के तहत धातु और नगदी में मिले दान से इसका निर्माण कराया था। जिसमें हिसाब-किताब में पूरी पारदर्शिता रखी गई। साथ ही पूरी मेहनत भी की, लेकिन इसमें कहीं न कहीं लापरवाही मजदूरों या ठेकेदार की होना तय है। चूंकि अब यह महाघंटा पशुपतिनाथ मंदिर प्रबंध समिति को सौंप दिया गया है इसलिए अब इसकी जिम्मेदारी प्रबंध समिति की है। प्रबंध समिति का कहना है कि महाघंटे पर लगा दोलन का नट थोड़ा ढीला हो गया था इसलिए उसे निकालकर अलग रख दिया है तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता से इसे फिर से लगा दिया जायेंगा।
इस महाघंटा को लेकर लोग काफी उत्साहित थे। 8 मई 2021 को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह ने 37 टन के इस महाघंटा का लोकार्पण किया, लेकिन दूसरे दिन उत्साहित लोग जब पशुपतिनाथ में इस महाघंटे को देखने के लिए पहुंचे तो इसका दोलन ही गायब था। जब इसको करीब से देखा गया तो अंदर की तरफ लेप भी निकलने लगा है। जिससे इसमें निर्माण में कहीं न कहीं भ्रष्टाचार सामने आ रहा है, हालांकि सामाजिक संस्था श्री कृष्ण कामधेनु धार्मिक लोकन्यास ने पूरी पारदर्शिता के साथ इसका निर्माण कराया, लेकिन इसके बाद भी कहीं न कहीं कमी रह गई है। यही कारण है कि अब चर्चा है कि सिर्फ गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने के लिए इसे लगा दिया गया, जबकि गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। पशुपतिनाथ मंदिर सहित अन्य मंदिरों में भी घंटे लगे हैं, लेकिन सालों से इनकी कोई परत बाहर नहीं आई। इधर महाघंटा के अंदर की तरफ अभी से ही परत निकलने लगी है, जबकि अभी तो लोगों ने इसका उपयोग भी नहीं किया।
बजा ही नहीं पाए लोग
महाघंटा 73.75 इंच यानी 6 फीट लंबा एवं 66.50 इंच व्यास का है। महाघंटे को बजाने के लिए 200 किलो से अधिक का दोलन भी तैयार किया गया। ठेकेदार का दावा था कि इसे बच्चे आसानी से बजा सके इसके लिए इसमें बैरिंग भी लगाया गया। हालांकि लोकार्पण के दूसरे ही दिन दोलन गायब हो गया। सिर्फ जनप्रतिनिधियों के फोटो महाघंटा बजाते हुए सामने आए।
नवनिर्मित सहस्त्र मंदिर निर्माण में भी गड़बड़ी
सहस्त्र मंदिर निर्माण में भी गड़बड़ी सामने आ रही है। पशुपतिनाथ मंदिर में दान के करीब चार करोड से अधिक राशि खर्च कर सहस्त्रशिवलिंग मंदिर का निर्माण कराया गया, लेकिन गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यहां कॉलम निर्माण में भारी गड़बड़ी छोड़ी गई है। जानकारों के मुताबिक कॉलेम व बीम में अलाइनमेंट नहीं है। कॉलेम में सरिया सीधा है या नहीं यह खुदाई पर पता चलेगा, लेकिन कॉलम पर कॉलम सहीं नहीं है। दो कॉलम में ज्वाइंट साफ दिख रहा ळै। लग रहा है। अलग से कॉलम रख दिया गया। कांक्रीट में कभी भी ज्वाइंट नहीं आना चाहिए। रेनफोर्समेंट, सेटरिंग प्रॉपर नहीं की गई है।
महाघंटे की जिम्मेदारी अब प्रबंध समिति की
राजेश पाठक, सदस्य, महाघंटा अभियान समिति ने आज हिन्दुस्थान समाचार से चर्चा करते हुए बताया कि महाघंटे के निर्माण को लेकर पूरी पारदर्शिता हमारे द्वारा अपनाई गई थी। दोलन या महाघंटे में क्या समस्या हुई इसकी पूरी जानकारी मुझे नहीं है। हम महाघंटे को प्रबंध समिति को सौंप चुके है अब इसकी देखरेख पशुपतिनाथ मंदिर प्रबंध समिति की है।
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