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अगले दो महीने में मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन सांसद अभी भी अपने क्षेत्र में सक्रिय नहीं हैं। इस वजह से एक बार फिर सांसदों को क्षेत्रीय जनता के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है।
पिछले दिनों अनूप मिश्रा और भागीरथ प्रसाद को इस गुस्से से दो-चार होना पड़ा, जब स्थानीय लोगों ने संसदीय क्षेत्र में ही लापता होने के पोस्टर लगा दिए और पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत भी दर्ज की। अनूप मिश्रा के बारे में जानकारी देने पर 51 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया गया।
यह सभी भाजपा के सांसद हैं। यह पहली बार नहीं है, जब सांसदों के लापता होने के पोस्टर उनके क्षेत्र में चिपकाए गए हैं। एक साल में भाजपा के आधा दर्जन से ज्यादा सांसदों के खिलाफ ऐसे अभियान चल चुके हैं। हालांकि पिछले दिनों ओबीसी और सामान्य वर्ग के लोगों ने एससी-एसटी एक्ट के विरोध में पोस्टर लगाए थे।
दरअसल, भाजपा के कई सांसद अब अपने लिए विधानसभा सीट ढूंढ रहे हैं। भागीरथ प्रसाद खुद गोहद से विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक माने जा रहे हैं, वहीं अनूप मिश्रा की विधायक बनने की इच्छा किसी से छुपी नहीं है।
गुमशुदगी के पोस्टर लगने के बाद भिंड सांसद भागीरथ प्रसाद ने कहा कि महज कुछ लोग क्षेत्र में मेरा विरोध कर रहे हैं। यह विरोध भी एससी-एसटी एक्ट को लेकर है। मैं लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहा हूं। पिछले एक हफ्ते से क्षेत्र से जुड़े विषयों पर ही बैठकें कर रहा हूं। कुछ लोगों के विरोध से मेरे द्वारा कराया गया विकास नहीं छुपेगा।
नागेंद्र सिंह: अप्रैल 2018 में खजुराहो सांसद नागेंद्र सिंह के लापता होने के पोस्टर फेसबुक पर जारी किए गए। उनके संसदीय क्षेत्र में भी यह पोस्टर लगाकर लोगों ने नाराजगी जाहिर की।
सुभाष पटेल: खरगोन सांसद सुभाष पटेल के खिलाफ ऐसे अभियान एक नहीं दो बार चल चुके हैं। पिछले साल कुछ ग्रामीणों ने उनके खिलाफ पोस्टर लगाए थे। ज्यादातर लोग सांसद के रवैये से नाराज थे।
ज्ञान सिंह: मंत्री पद छोड़कर बेमन से सांसद बने ज्ञान सिंह को भी पिछले साल इस विरोध का सामना करना पड़ा। ज्ञान सिंह को गुमशुदा बताने वाला मैसेज सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था।
सुषमा स्वराज: विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के खिलाफ भी विदिशा में पोस्टर अभियान चल चुका है। सुषमा स्वराज काफी समय अपने संसदीय क्षेत्र से दूर रहीं।
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