
Dakhal News

साहित्यकार एवं कवि बालकवि बैरागी को मनासा में अंतिम विदाई दी गई। शोक स्वरूप पूरा मनासा नगर बंद रहा। बड़ी संख्या में लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे थे। बालकवि बैरागी साहित्य और कविता के साथ राजनीति के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे। वे राज्यसभा के सदस्य रहे। इस सरस्वती पुत्र को कई सम्मानों से नवाजा गया था। बैरागी का मनासा में भाटखेड़ी रोड पर कवि नगर पर निवास है। वहीं उन्होंने रविवार शाम 6 बजे अंतिम सांस ली थी।
बैरागी जी की गिनती कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में होती थी। वे मध्यप्रदेश में अर्जुन सिंह सरकार में खाद्यमंत्री भी रहे। उन्हें मध्यप्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा कवि प्रदीप सम्मान भी प्रदान किया गया। साहित्य और राजनीति से जुड़े रहने के कारण उनकी कविताओं में साहित्य और राजनीति की झलक देखने को मिलती है। गीत, दरद दीवानी, दो टूक, भावी रक्षक देश के, आओ बच्चों गाओ बच्चों बैरागी की प्रमुख रचनाएं हैं।
मृदुभाषी और मस्तमौला स्वभाव तथा सौम्य व्यक्तित्व के धनी बालकवि बैरागी ने अंतरराष्ट्रीय कवि के रूप में नीमच जिले को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया था। बताया जाता है कि नीमच में एक कार्यक्रम में शामिल होकर वे अपने घर मनासा पहुंचे थे। वहां कुछ समय आराम करने के लिए अपने कमरे में गए। शाम करीब 5:00 बजे जब उन्हें चाय के लिए उठाया गया तो उनके निधन की खबर लगी।
Dakhal News
All Rights Reserved © 2025 Dakhal News.
Created By:
![]() |