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फेसबुक डाटा लीक के बाद खड़े हुए विवाद से सीख लेते हुए सर्च इंजन गूगल ने सियासी विज्ञापनों को पारदर्शी बनाने के लिए नई नीतियों की घोषणा की है। गत माह फेसबुक ने अपनी धूमिल छवि को सुधारने के लिए कई उपाय किए थे जिसमें राजनीतिक विज्ञापनदाताओं की पहचान की सत्यता जांचना आदि शामिल था।
इसी तर्ज पर तकनीक के दिग्गज गूगल ने भी अपनी विज्ञापन नीतियों में सुधार किया है। नई नीति के मुताबिक, विज्ञापन देने वाले को कंपनी के सामने यह प्रमाणित करना होगा कि वह अमेरिका के वैध नागरिक हैं। इसके लिए उन्हें सरकार द्वारा जारी आइ-डी एवं अन्य जानकारियां जमा करनी होगी।
गूगल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष केंट वाल्कर ने कहा, 'विज्ञापन के साथ ही उसके लिए भुगतान करने वाले का नाम सार्वजनिक करना भी अब अनिवार्य होगा। इसके अतिरिक्त सियासी विज्ञापनों के लिए एक लाइब्रेरी भी तैयार की जा रही है। इससे यूजर खुद सियासी विज्ञापन और उसका भुगतान करने वाले का नाम सर्च कर पाएंगे।'
इन सुधारों के साथ ही गूगल विशेष रूप से राजनीतिक विज्ञापनों पर केंद्रित एक 'पारदर्शी रिपोर्ट' भी जारी करने जा रहा है। इससे यह सामने आ जाएगा कि कौन-कौन से लोग सियासी विज्ञापन के लिए भुगतान कर रहे हैं और इसमें कितनी राशि खर्च की जा रही है।
ऑनलाइन हमलों का शिकार होने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए गूगल ने अपने 'प्रोटेक्ट योर इलेक्शन' प्रोग्राम के तहत कई नए टूल्स भी तैयार किए हैं।
वाल्कर ने बताया कि चुने गए अधिकारियों, अभियानों और कंपनी के कर्मचारियों के लिए एक सिक्योरिटी ट्रेनिंग प्रोग्राम भी चलाया जाएगा। प्रोग्राम को फंड करने के लिए कंपनी ने 'नेशनल साइबर सिक्योरिटी एलायंस' और हार्वर्ड केनेडी स्कूल के 'डिजिटल डेमोक्रेसी प्रोजेक्ट' से समझौता भी किया है।
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