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राहुल शर्मा
कोई भी व्यक्ति या संस्थान किसी पर अपनी विचारधारा नहीं थोप सकता। सभी किसी भी विषय पर विचार करने के लिए स्वतंत्र हैं। अगर विचारधारा थोपी जा रही होती तो सबकी सोच एक जैसी होना थी। लेकिन, ऐसा नहीं है। जो लोग सवाल उठाते हैं वे भी इसी समाज का हिस्सा हैं और बेहतरी चाहते हैं। यह बात माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के नए कुलपति और प्रतिष्ठित पत्रकार जगदीश उपासने ने कही। उन्होंने पत्रकारिता और समाज से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की। वे जानी-मानी पत्रिका इंडिया टुडे (हिंदी) के लंबे समय तक संपादक रहे हैं। पेश हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश...
सवाल - माखनलाल विवि पर हमेशा संघ की विचारधारा को आगे बढ़ाने या उस पर काम करने के आरोप लगते रहे हैं, आप क्या मानते हैं?
उपासने - ऐसा नहीं है। अगर संघ की विचारधारा पर ही काम करने के आरोप हैं तो यह आरोप आए कहां से ? विश्वविद्यालय की बेहतरी चाहने वालों ने ही यह आरोप लगाए हैं। आरोप लगाने वाले बहुत से लोग यहां से किसी न किसी रूप से जुड़े हुए हैं। इनमें पूर्व छात्र भी शामिल हो सकते हैं। अगर विचारधारा थोपी जाती तो वे यह आरोप कैसे लगाते। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि संघ की विचारधारा को थोपा जा रहा है। सभी यह चाहते हैं कि विवि की बेहतरी के लिए काम हो। इसी पर फोकस भी करना है।
सवाल - पत्रकारिता से विवि का कुलपति बनना। भूमिका बदली है, कैस लग रहा है?
उपासने - विवि से पूर्व से जुड़ा रहा हूं। लंबे समय तक पत्रकारिता की है। इसकी चुनौतियों को समझता हूं। चाहता हूं कि यहां के छात्रों को अच्छा रोजगार मिले। जो मांग है उसके मुताबिक छात्र तैयार हों। डिजीटल मीडिया के आने से प्रिंट मीडिया के लिए चुनौती बढ़ी है।
सवाल - आपको लगता है समाचारों के प्रस्तुतीकरण में बदलाव होना चाहिए?
उपासने - समाचार मनोरंजन नहीं है। समाचार को मनोरंजन समझा भी नहीं जाना चाहिए। खासकर चैनलों को इस ओर ध्यान देना चाहिए। समाचारों की गंभीरता को बनाए रखना चाहिए। जब छात्र इस बात को समझते हैं तो मीडिया संस्थानों को भी इस ओर सोचने की जरूरत है।
सवाल - विवि के नए परिसर में गौशाला खोले जाने के विचार का मुद्दा काफी गर्माया था। क्या गौशाला को यथावत रखेंगे ?
उपासने - अभी तो मैं यहां आया ही हूं। इस बारे में सुना था। अभी इस पर कुछ नहीं कहना चाहूंगा। पूरी जानकारी लेने के बाद ही कुछ कह सकूंगा।
सवाल - विवि के लिए क्या करना चाहेंगे?
उपासने - छात्रों को बेहतर शिक्षा मिले। यहां से पास होने के बाद अच्छा रोजगार मिले इसके लिए काम करेंगे। बाजार की जरूरत के मुताबिक छात्र तैयार करेंगे। जरूरत पड़ी तो पाठ्यक्रम में भी बदलाव करेंगे।[नवदुनिया से साभार ]
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