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केन्द्र शासन द्वारा हाल ही में जारी सेम्पल रजिस्ट्रेशन सर्वे (एसआरएस-2016) में मध्यप्रदेश में बाल मृत्यु दर में 7 अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई है। परिणाम स्वरूप 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की बाल मृत्यु दर वर्ष 2015 के 62 से गिरकर 55 प्रति हजार जीवित जन्म हो गई है। यह गिरावट राज्य शासन द्वारा आरंभ किये गये दस्तक अभियान, विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं और अन्य प्रयासों के चलते हुई है।
देश में सर्वाधिक गिरावट दर्ज करने वाले राज्यों में 10 अंक के साथ असम प्रथम और 7 अंक के साथ मध्यप्रदेश द्वितीय स्थान पर है। भारत में बाल मृत्यु दर में 4 अंकों की गिरावट दर्ज हुई है। यह दर वर्ष 2015 में 43 से घटकर 39 प्रति हजार जीवित जन्म रिपोर्ट हुई है।
बाल मृत्यु के प्रमुख कारणों में निमोनिया 14 प्रतिशत, दस्त रोग 9.2 प्रतिशत, गंभीर कुपोषण 45 प्रतिशत और गंभीर एनीमिया हैं। इसे मद्देनजर रखते हुए प्रदेश में 6 माह के अंतराल में घर-घर जाकर दस्तक अभियान में पीड़ित बच्चों की पहचान, उपचार और प्रबंधन की कार्यवाही की जा रही है।
अभियान में 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को विटामिन-ए की खुराक रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास के लिये दी जा रही है। गंभीर रक्ताल्पता से ग्रसित बच्चों को नि:शुल्क खून चढ़ाया जा रहा है। इससे वे बाल्यावस्था में होने वाली बीमारियों से बच रहे हैं। दस्त रोग की रोकथाम के लिये हर घर में ओआरएस तथा जिंक गोली वितरण के साथ उचित शिशु एवं बाल आहार की समझाइश भी परिवारों को दी जा रही है। सुदूर इलाकों में परिवारों को बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि पहली बार प्रदेश में बाल मृत्यु दर में इतनी महत्वपूर्ण गिरावट दर्ज की गई है।
दस्तक अभियान के 15 जून से 31 जुलाई-2017 के मध्य हुए प्रथम चरण में 5 वर्ष से कम उम्र के 76 लाख बच्चों तक घर-घर पहुँच बनाई गई। गंभीर कुपोषण, गंभीर एनीमिया, निमोनिया, दस्त रोग, जन्मजात विकृतियों तथा अन्य बीमारियों की सक्रिय पहचान की गई।
द्वितीय चरण 18 दिसम्बर, 2017 से 18 जनवरी, 2018 के मध्य किया जा रहा है। अब तक 68 लाख बच्चों की नामजद जानकारी दर्ज करने के साथ 23 लाख बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर चिन्हित बच्चों का नि:शुल्क उपचार किया जा रहा है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिये विटामिन-ए का सप्लीमेंट दिया गया है। पोषण पुनर्वास केन्द्रों में 1500 बच्चों को भर्ती किया जा चुका है और शेष बच्चों को नि:शुल्क परिवहन से लाने की व्यवस्था की जा रही है। 514 बच्चों को नि:शुल्क ब्लड ट्रांसफ्यूजन (खून चढ़ाना) किया जा चुका है, शेष की व्यवस्था की जा रही है। जन्मजात विकृतियों वाले 3237 बच्चों की पहचान कर उनके इलाज का नि:शुल्क प्रबंध किया जा रहा है। निमोनिया के 2245 और दस्त रोग के 3351 बच्चों की पहचान कर उपचारित किया गया है। गंभीर संक्रमण सेप्सिस से पीड़ित 1318 बच्चों की पहचान कर उपचारित किया जा रहा है। यह बच्चे दो माह से कम उम्र के हैं। करीब 25 हजार बच्चों में अन्य बीमारियाँ पाई गईं जिनके उपचार का प्रबंध दस्तक दल द्वारा किया जा रहा है।
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