Patrakar Vandana Singh
मध्यप्रदेश में पिछले 25 दिन में पांच बाघ और दो तेंदुओं का शिकार हो गया। फिर भी वाइल्ड लाइफ मुख्यालय के अफसरों ने फील्ड (मैदान) में जाकर घटनाओं की जांच करना मुनासिब नहीं समझा। जिन अफसरों के क्षेत्रों में घटनाएं हुई हैं, मुख्यालय के अफसर उन्हीं की जांच रिपोर्ट से संतुष्ट हैं। हैरत तो इस बात की है कि वनमंत्री और मुख्यमंत्री भी शिकार के मामलों में ध्यान नहीं दे रहे। उन्हें अफसरों ने बता रखा है कि 10 फीसदी मौतें स्वभाविक हैं।
वहीं विशेषज्ञ कहते हैं कि फंदे में फंसने से होने वाली मौत स्वभाविक कैसे हो गई। शहडोल वनवृत्त में चार बाघ व एक तेंदुए का शिकार हुआ है, जबकि पन्ना टाइगर रिजर्व में महज दो दिन के अंतर से एक बाघिन व एक तेंदुए फंदे में फंसे मिले हैं। पन्ना के वन अफसर आरोपियों को पकड़ने में लगे हुए हैं।
मुख्यालय के अफसरों का कहना है कि वे जल्द ही आरोपियों को पकड़ लेंगे, लेकिन मैदानी अफसरों और कर्मचारियों से हुई चूक को लेकर जांच की बात नहीं की जा रही है। सूत्र बताते हैं कि मुख्यालय के अफसरों के लिए ये बिंदु जांच का विषय ही नहीं है। वे तो मैदानी अफसरों से ही जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करने का कह रहे हैं।
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