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एमपी विधानसभा में मंत्री माया सिंह के मेट्रो को लेकर दिए गए बयान के कई मायने निकाले गए। क्योंकि सब जानते हैं कि अगले साल मेट्रो नहीं चल सकती। जब पड़ताल हुई तो पता चला कि दो वरिष्ठ अधिकारियों ने यह जवाब बनवाया था। दरसअल, सरकार की इच्छा है कि इलेक्शन 2018 से पहले भोपाल और इंदौर में मेट्रो का भूमि पूजन कर दिया जाए और इसे बीजेपी गवनर्मेंट की बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया जाए।
मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) से लोन पर सहमति मिलने के बाद अब भोपाल मेट्रो के लिए भी उम्मीद जगी है। मेट्रों के लिए भोपाल में पहले फेज में दो रूटों को शामिल किया गया है। एक करोंद से एम्स और दूसरा जवाहर चौक से रत्नागिरी तिराहा तक। इन दो रूटों के लिए राजधानी में मेट्रो लाइन बिछाया जाना प्रस्तावित है। इसमें 6962.92 करोड़ खर्च हो रहे है। इसके लिए 3885 करोड़ के कर्ज के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।
2018 तक भोपाल में मेट्रो का काम शुरू हो जाएगा। भोपाल और इंदौर में मेट्रो ट्रेन चलाने भारी भरकम बजट की जरुरत होती है।
ल्ल माया सिंह, विधानसभा में नगरीय विकास मंत्री
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गैर ने कहा जब छोटे-छोटे शहरों में मेट्रो ट्रेन शुरू हो चुकी है तो फिर हमारे बड़े शहरों में क्यों मेट्रो नहीं आ पाई। मेट्रो को लेकर सरकार सिर्फ कागजी कार्रवाई में ही उलझी है। सरकार गंभीर होती तो मेट्रो का काम 2013 में शुरू हो सकता था।
मेट्रो के लिए जायका के लोन देने से इंकार के बाद यूआईबी से ऋण के लिए प्रस्ताव भेजा था। लोन पर फैसला गत मई में होना था, लेकिन जवाब नहीं आया। अब जुलाई महीने तक इस मामले में जवाब मिलने की उम्मीद है। ज्ञात हो कि बैंक की टीम ने अप्रैल में मेट्रो रूट का निरीक्षण करके वापस जा चुकी है। माना जा रहा है कि यूआईबी भोपाल के मेट्रो में ज्यादा रुचि नहीं ले रहे हैं। जिससे जवाब मिलने में देरी हो रही है।
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