Patrakar Priyanshi Chaturvedi
जबलपुर में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रदेश के जनसंपर्क और संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा की निर्वाचन आयोग के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई दो सप्ताह आगे बढ़ा दी है। इसके चलते मिश्रा अब राष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।
मिश्रा के खिलाफ आयोग में शिकायत करने वाले राजेंद्र भारती की ओर से मंगलवार की सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा ने मुख्य न्यायाधीश हेमंत गुप्ता की अध्यक्षता वाली युगलपीठ को बताया कि याचिका को ग्वालियर खंडपीठ से जबलपुर स्थानांतरित करने के संबंध में उच्चतम न्यायालय की शरण ली गई है। उन्होंने युगलपीठ को बताया कि उच्चतम न्यायालय में दायर उनकी विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई अभी लंबित है, जिसके बाद युगलपीठ ने मिश्रा की याचिका पर सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित कर दी।
यह मामला चुनाव आयोग द्वारा 23 जून को दिए उस आदेश से संबंधित है, जिसमें मंत्री नरोत्तम मिश्रा को पेड न्यूज से संबंधित मामले में दोषी पाते हुए 3 साल के लिए अयोग्य ठहराया गया था।
भारत निर्वाचन आयोग ने मिश्रा का विधानसभा निर्वाचन तीन वर्षों के लिए अयोग्य ठहरा दिया था। इसके खिलाफ मिश्रा ने ग्वालियर खंडपीठ में याचिका दायर की थी। मिश्रा ने इसे मुख्यपीठ में स्थानांतरित करने का आग्रह किया था।
प्रिंसिपल रजिस्ट्रार के निर्देश पर 7 जुलाई को ग्वालियर पीठ के न्यायाधीश विवेक अग्रवाल ने मंत्री मिश्रा की याचिका को सुनवाई के लिए मुख्यपीठ में स्थानांतरित कर दिया था। इसके खिलाफ शिकायतकर्ता राजेन्द्र भारती ने हाईकोर्ट की मुख्यपीठ को एक पत्र लिखते हुए इस पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि मुख्यपीठ में दायर याचिका प्रायोजित है। दूसरी ओर उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ में एक जनहित याचिका दायर कर एक पत्रकार ने मिश्रा की विधानसभा सीट रिक्त घोषित किए जाने की मांग की थी। मंगलवार को इन दोनों याचिकाओं की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश हेमंत गुप्ता की अध्यक्षता वाली युगलपीठ द्वारा की गई।
मंत्री नरोत्तम मिश्रा का कहना है था - जिस अखबार की खबर को आधार बनाकर शिकायत की गई है उसने न्यूज पेड होने से इनकार किया है। एक भी ओरिजनल डॉक्यूमेंट पेश नहीं किया गया। ऐसे तो कोई भी किसी के खिलाफ झूठी फोटोकॉपी पेश कर केस कर देगा। 17 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव की वोटिंग होनी है। मैं वोटर हूं। चुनाव आयोग के इस फैसले से वोट नहीं दे पाऊंगा। इसलिए राहत (स्टे) दें।
राजेंद्र भारती का कहना था -चुनाव आयोग ने इन्हें (नरोत्तम की तरफ इशारा करते हुए) अयोग्य घोषित किया है। नरोत्तम ने स्टे मांगा है और हमने भी केविएट दायर की है। दिल्ली से मेरे वकील नहीं आ सके हैं। बहस पूरी हुए बगैर स्टे नहीं दें।
लॉ डिपार्टमेंट के डायरेक्टर विजय पांडे (चुनाव आयोग):आयोग ने नरोत्तम मिश्रा और राजेंद्र भारती को सुनवाई का पूरा मौका दिया था। दोनों पक्षों की बात सुनने और तथ्यों के आधार पर ही मिश्रा को अयोग्य घोषित किया गया है।
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