Patrakar Priyanshi Chaturvedi
गिनीज विश्व रिकार्ड तैयारियों का प्रशिक्षण 20 जून को
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के संकल्प के अनुसार 2 जुलाई को नर्मदा बेसिन के 24 जिलों में 6 करोड़ पौधे रोपे जायेंगे। इनमें से 3 करोड़ पौधे वन विभाग और शेष 3 करोड़ पौधे ग्रामीण विकास, कृषि, उद्यानिकी, जन अभियान परिषद, नगरीय प्रशासन, स्कूल शिक्षा विभाग आदि द्वारा रोपित किये जायेंगे। संबंधित जिलों में रोपण के लिये गढ्ढा खुदाई का कार्य प्रगति पर है।
नर्मदा बेसिन के 24 जिले- अनूपपुर, डिण्डौरी, मंडला, जबलपुर, कटनी, इंदौर, धार, अलीराजपुर, देवास, खंडवा, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, सिवनी, नरसिंहपुर, दमोह, सागर, हरदा, होशंगाबाद, रायसेन, बैतूल, छिन्दवाड़ा, सीहोर और बालाघाट जिले में 2 जुलाई को फलदार एवं छायादार वृक्षों के पौधे लगाये जायेंगे। सघन वृक्षारोपण से नर्मदा को सतत जल आपूर्ति होने के साथ ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी।
गिनीज विश्व रिकार्ड बनाने संबंधी तैयारियों के लिये 20 जून को आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन अकादमी में प्रशिक्षण दिया जायेगा। प्रशिक्षण में प्रत्येक जिले से 2-2 रिसोर्स पर्सन्स को प्रशिक्षित किया जायेगा। प्रशिक्षित रिसोर्स पर्सन्स अपने-अपने जिले में गिनीज विश्व रिकार्ड बनाने की प्रक्रिया में नियुक्त होने वाले विटनेस एवं स्टूवर्ड को प्रशिक्षित करेंगें। गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड बनाने के लिए विटनेस एवं स्टूवर्ड द्वारा विश्व रिकार्ड मापदण्डों के अनुसार प्रस्तुत किया गया अभिलेख अति-आवश्यक है।
गिनीज विश्व रिकार्ड के मद्देनजर प्रत्येक रोपण स्थल में पौधों के सत्यापन के लिये 2-2 शासकीय अधिकारी-कर्मचारी की तैनाती के साथ रोपित पौधों की फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी की भी व्यवस्था की जा रही है। प्रत्येक रोपण स्थल की जीपीएस (लेटीट्यूड एवं लॉगीट्यूड) भी ली जा रही है। इससे रोपण स्थलों को पहचाना जा सकेगा।
पौध-रोपण में अधिक से अधिक जन-भागीदारी के लिये शासन द्वारा ऑनलाइन पंजीयन व्यवस्था की गई है। www.namamidevinarmade.gov.inवेबसाइट पर अब तक लगभग डेढ़ लाख लोग 2 जुलाई 2017 को पौध-रोपण के लिये पंजीयन करा चुके हैं।
वानिकी प्रजाति के आवश्यक पौधों की व्यवस्था वन विभाग एवं निजी रोपणियों द्वारा की गई हैं। फलदार प्रजाति के पौधों की व्यवस्था उद्यानिकी विभाग, शासकीय निजी रोपणियों और अन्य राज्यों से की जा रही है। विभिन्न विभाग अपने-अपने रोपण लक्ष्यों के अनुसार गढ्ढा खुदाई कर रहे हैं। कई जिलों में गढ्ढा खुदाई का काम पूरा होने को है।
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