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वीवीआईपी कल्चर पर लगाम लगाने के लिए मोदी कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला किया है। अब केंद्र के अधिकारी और केंद्रीय मंत्री अपनी गाड़ियों पर लाल बत्ती नहीं लगा सकेंगे। यह फैसला 1 मई से लागू किया जाएगा हालांकि, राज्य में यह फैसला लागू करना वहां की सरकारों पर छोड़ दिया गया है।
इसका एक सांकेतिक महत्व भी है। 1 मई को मजदूर दिवस है इसलिए इस दिन मोदी सरकार यह संदेश देना चाहती है कि उसके मंत्री वीवीआईपी कल्चर से दूर रहेंगे। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, उपराष्ट्रपति, स्पीकर को इससे छूट होगी।
कैबिनेट के निर्णय के बाद केंद्रीय सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने अपनी कार से तुरंत ही लाल बत्ती हटा ली है। इस बारे में जानकारी देते हुए केंद्रीय वित्त और रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि लाल बत्ती देने के नियम को खत्म किया गया है, अब देश में कोई लालबत्ती का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। उन्होंने कहा कि कुछ आपात सेवाओं के लिए नीली बत्ती का इस्तेमाल होगा। पुलिस, एंबुलेस और फायर ब्रिगेड को नियम से छूट दी गई है।
इससे पहले कैबिनेट मीटिंग के बाद पत्रकारों से बातचीत में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि 1 मई से पीएम और सभी मिनिस्टर्स की गाड़ियों से हटा दी जाएगी। इसका इस्तेमाल सिर्फ इमरजेंसी सर्विस व्हीकल्स पर ही किया जाएगा। सू्त्रों के अनुसार, लाल बत्ती का इस्तेमाल खत्म करने के लिए सड़क व परिवहन मंत्रालय काफी समय से काम कर रहा था। पीएमओ में यह मामला करीब डेढ़ साल से पेंडिंग था। इस मुद्दे पर चर्चा के लिए पीएमओ ने एक मीटिंग भी की थी, जिसमें कई बड़े अधिकारियों से बात की थी। फैसला कैसे लागू किया जाए इस पर परिवहन मंत्रालय ने पांच ऑप्शन दिए थे।
हालांकि राज्य सरकारें इस पर फैसला खुद लेंगी, लेकिन माना जा रहा है कि इस फैसले के बाद राज्यों पर, खासकर भाजपा शासित राज्यों पर इसे लागू करने का दबाव रहेगा। वैसे बहुत सारे मंत्री लालबत्ती के पक्ष में बयान देते रहे हैं, सो उनके दिल में इसे छोड़ते वक्त कसक तो रहेगी।
इससे पूर्व पंजाब की अमरिंदर सरकार ने लाल बत्ती पर रोक लगा दी थी। पंजाब के मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों, अधिकारियों और वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर बैठे लोगों के अलावा किसी को लालबत्ती के इस्तेमाल की इजाजत नहीं होगी। इसके बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लालबत्ती से हूटर निकालने की बात कही थी।
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