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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा आज मंत्रालय में गेहूँ उपार्जन की तैयारियों की समीक्षा की गई। बताया गया कि इंदौर एवं उज्जैन संभाग में 15 मार्च से गेहूँ उपार्जन कार्य प्रारम्भ हो जायेगा। भोपाल एवं नर्मदापुरम में 20 मार्च से और चंबल, ग्वालियर, रीवा, शहडोल, जबलपुर और सागर संभाग में 27 मार्च से समर्थन मूल्य पर गेहूँ-खरीदी प्रारम्भ हो जायेगी। इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह भी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि गेहूँ खरीदी की समस्त व्यवस्थाएँ किसान-हित के अनुसार की जायें। किसान-हितों का संरक्षण सरकार की जवाबदारी है। उन्होंने कहा कि खरीदी कार्य संचालन व्यवहारिक दृष्टिकोण के साथ किया जायें। किसानों की आवश्यकताओं और अपेक्षाओं को पूरा करने पर दृष्टिकोण केन्द्रित रहना चाहिये। उन्होंने कहा कि उपार्जन-अवधि में किसान-परिवारों में वैवाहिक कार्यक्रम आदि का आयोजन होता है। इसलिये भुगतान संबंधी व्यवस्थाओं की समय-सीमा का अक्षरक्ष: पालन करवाया जाये। उन्होंने कहा कि किसानों को पंजीयन करवाने का एक और अवसर दिया जाये ताकि पात्र किसान छूटें नहीं। बारदानों की अग्रिम उपलब्धता सुनिश्चित की जायें। उन्होंने बारदाना आपूर्ति की नियमित मानीटरिंग करने को कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उपार्जित गेहूँ परिवहन की व्यवस्थाएँ प्रभावी हों तथा रूट का निर्धारण युक्तिसंगत हों। ट्रांसपोर्टर का एकाधिकार नहीं हो। क्षमता का परीक्षण कर ही कार्य सौंपा जाये। मुख्यमंत्री ने किसानों के पंजीयन, उपार्जन केन्द्रों की व्यवस्था, उपार्जित गेहूँ के परिवहन, भंडारण और भुगतान की व्यवस्थाओं की समीक्षा की।
बताया गया कि इस वर्ष गेहूँ उपार्जन के लिए विगत सात वर्ष में सर्वाधिक 2,963 केन्द्र बनाए गए हैं। खरीदी 1625 रूपये प्रति क्विंटल मूल्य पर की जायेगी। उपार्जन समितियों द्वारा अधिकतम 3 दिवस में किसानों को भुगतान किया जायेगा।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री अशोक वर्णवाल, प्रमुख सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति श्री के.सी. गुप्ता, आयुक्त खाद्य-नागरिक आपूर्ति श्री फैज अहमद किदवई, आयुक्त सहकारिता श्री कवीन्द्र कियावत एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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