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श्योपुर जिले में कुपोषण के हालात जानने के लिए जिन 10 टीमों को गांवों में भेजा गया, उन टीमों ने पहले दिन ही 66 गांवों से 240 कुपोषित बच्चे ढूंढ निकाले। इनमें से 83 अति कुपोषित बच्चे हैं, जिनको एनआरसी में भर्ती करवाना शुरू कर दिया गया है।
जिले में कुपोषण के हालात इतने भयाभह हैं कि सारी तैयारियांं और संशाध्ान कम पड़ रहे हैं। हालत यह है कि एनआरसी में बेड नहीं मिल रहे। जमीन पर बैठकर मां अपने बच्चों का इलाज करा रही हैं। कुपोषितों के इलाज के लिए दूसरे जिलों से 9 डॉक्टर बुलाए गए हैं।
कुपोषण से लगातार मौतों और भोपाल से आए अफसरों के निर्देश के बाद कलेक्टर ने 10 टीमें बनाई। हर टीम में एक-एक डॉक्टर, एक हेल्थ न्यूट्रीशियन विशेषज्ञ, एक फीडिंग डिमोस्ट्रेटर, महिला बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर व एक एएनएम शामिल हैं।
दिनभर में 66 गांवों में पहुंची टीमों में 1315 बच्चों का हेल्थ चेकअप किया गया। बुधवार की सुबह कलेक्टर ने सभी 10 टीमों की बैठक ली और सभी से वन-टू-वन चर्चा की। बैठक के बाद कलेक्टोरेट से ही टीमों को फिर गांवों में भेजा गया।
बुधवार दोपहर तक श्योपुर एनआरसी में 100, कराहल में 64 और विजयपुर में 24 कुपोषित भर्ती हैं। यह संख्या बढ़ती जा रही है, जबकि एनआरसी की क्षमता 20 बच्चों की है। एनआरसी की ऐसी दुर्दशा देख कलेक्टर पीएल सोलंकी ने बुधवार को छात्रावासों से पलंग मंगाए।
ग्वालियर से डॉ. मोनिका यादव, डॉ. जीएस गुप्ता, दतिया से डॉ. बीडी गौतम, शिवपुरी से डॉ. सुनील तोमर, आनंद कुमार जैन, मुरैना से डॉ. केके दण्डौतिया, डॉ. एके गुप्ता, भिंड से डॉ. शैलेन्द्र सिंह तोमर एवं डॉ. दिनकर की श्योपुर ड्यूटी लगा दी गई है। यह सभी एनआरसी में भर्ती बच्चों की सेहत से लेकर गांवों में जाकर कुपोषितों का इलाज करेंगे। इनके अलावा 7 एएनएम को भी श्योपुर, कराहल व विजयपुर एनआरसी में नियुक्त किया गया है।
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