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अफसर लड़ें और अफसर भिड़े
मध्यप्रदेश क्या अब रामभरोसे है। एमपी में ब्यूरोक्रेसी के कामकाज के तौर तरीकों को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। जहां एक ओर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ब्यूरोक्रेसी के बेलगाम होने का मामला उठा रहे हैं दूसरी ओर ब्यूरोक्रेट्स आपस में भिड़ रहे हैं। आलम यह है कि जिन वरिष्ठ अधिकारियों को अपने जूनियर अधिकारियों के सामने नजीर पेश करना चाहिए वे आपस में एक दूसरे पर छींटाकशी करते नजर आ रहे हैं। कुछ ब्यूरोक्रेट्स अपनी बद्जुबानी और बद्मिजाजी के चलते चर्चा में हैं बावजूद इसके ऐसे अफसरों की कारगुजारियों पर सरकार आंख मूंदे है।
बड़े और बिगड़े अधिकारियों को ठीक करना जानता हूं
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने अफसरों के बेलगाम होने पर कहा कि कभी लोगों को लगने लगता है कि दुनिया उनके भरोसे ही चल रही है और वे मनमानी करने लगते हैं, ऐसे लोगों को बीच-बीच में उनकी हैसियत बताते रहना जरूरी होता है । उन्होंने कहा कि कोई कितना भी बड़ा और बिगड़ा अधिकारी क्यों न हो मैं उसे ठीक करना जानता हूं। मुझे बिगडे घोड़ो पर लगाम लगाना और उनकी सवारी करना आता है। कल इंदौर में एक निजी चैनल से बातचीत में कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मैं किसी को भ्रष्ट अैर ईमानदारी का सार्टिफिकेट बांटने वाला व्यक्ति नहीं हूं पर जब आम जनता परेशान होती है तब मैं चुप नहीं रह सकता। मैंने पहले भी मर्यादाएं नहीं तोड़ी हैं और अभी भी मर्यादाओं के कारण ही चुप हूं। उन्होंने कहा कि मैं किसी अधिकारी को सही काम बताऊं और वह मना कर दें प्रदेश में अभी ऐसी स्थिति नहीं है। उन्होंने कहा कि सीएम पूरे प्रदेश की चिंता करते हैं पर उनकी व्यस्तता का लाभ उठाकर कई बार अफसर अपना काम ठीक से नहीं करते।
नंदूभैया को भी मारा ताना
प्रदेश भाजपाध्यक्ष नंदकुमार सिंह पर निशाना साधते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि उन्हें अफसरों को संरक्षण देने से पहले कार्यकर्ताओं की चिंता करना चाहिए। उन्हें संगठन की जिस कुर्सी पर बैठया गया है उसका पहला धर्म कार्यकर्ताओं की चिंता करना है।
PWD ने खत्म किया ठेकेदारी ग्रेड सिस्टम
लोक निर्माण विभाग ने सभी तरह के निर्माण कार्यों के लिए ठेकेदारों का ग्रेड सिस्टम खत्म कर दिया है। इस फैसले के बाद अब कोई भी ठेकेदार बड़ा-छोटा या सीनियर-जूनियर नहीं होगा। अब तक ठेकेदारों के ए, बी व सी ग्रेड के लिए 10 लाख, 5 लाख और 2 लाख रुपए सुरक्षा निधि जमा कराई जाती थी। विभाग के सचिव सीपी अग्रवाल द्वारा जारी आदेश के मुताबिक अब ठेकेदारों से अनुभव का प्रमाण पत्र भी नहीं लिया जाएगा। ठेकेदारों से पंजीयन के रूप में सिर्फ 25 हजार रुपए जमा कराए जाएंगे। पंजीयन की वैधता 5 साल के बजाय अब 10 साल रहेगी। विशेष प्रकृति के कामों के लिए संबंधित विभाग प्री क्वालिफिकेशन तय कर सकेंगे।
विवेक पोरवाल मानने को तैयार नहीं आदेश
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने पीडब्ल्यूडी के मैन्युअल को दरकिनार कर दिया है। कंपनी के मुताबिक टेंडर में उल्लेख होना चाहिए कि किस श्रेणी का ठेकेदार शामिल हो सकेगा। एमडी विवेक पोरवाल के निर्देश पर ठेकेदारों को कहा गया है कि ए-3 ग्रेड का ठेकेदार ए-2 व ए-1 ग्रेड का काम कर सकेगा पर ए-1 व ए-2 ग्रेड के ठेकेदार अपने ग्रेड के लिए काम से बड़ा काम नहीं ले सकेंगे। इनके पंजीयन के लिए अलग-अलग स्लैब भी तय किए गए हैं। मध्य क्षेत्र इलेक्ट्रिकल कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन ने कहा है कि जब पूरे प्रदेश में सभी विभागों में पीडब्ल्यूडी के मैन्युअल लागू हैं तो बिजली कम्पनी इस पर अमल क्यों नहीं करती? सरकार को इस पर रोक लगाना चाहिए।
IAS विवेक अग्रवाल से भिडे जिद्दी जुलानिया
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया और मुख्यमंत्री के सचिव विवेक अग्रवाल के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। मनरेगा के मजदूरों की मजदूरी भुगतान में विलंब को लेकर मुख्य सचिव अंटोनी डिसा द्वारा बुलवाई गई बैठक में भी दोनों के बीच विवाद हो गया। जब अग्रवाल ने कहा कि मैं इस बैठक के मिनिट्स बनवा लेता हूं तो जुलानिया ने कहा कि यह मेरे विभाग का मामला है इसके मिनिट्स मै बनवाउंगा आप नहीं। बैइक शहडोल, अनूपपुर और उमरिया में मनरेगा मजदूरी भुगतान में हो रही देरी को लेकर बुलाई गई थी।
जुलानिया के कारण CEO नहीं रहना चाहते अफसर
अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया के तेवर देख जिला एवं जनपद पंचायतों में काम करने वाले राज्य प्रशासनिक सेवा और ग्रामीण विकास सेवा के अफसर सीईओ नहीं रहना चाहते। इन अधिकारियों ने अपनी पदस्थापना फील्ड के बजाय दफ्तरों में कराने की जुगत लगानी शुरू कर दी है। एसीएस जुलानिया ने संभागीय समीक्षायें शुरू की हैं। पहली समीक्षा सागर संभाग की हुई। एसीएस ने सागर के सीईओ जिला पंचायत को फटकार लगाई है। पन्ना, छतरपुर और टीकमगढ़ के सीईओ की भी खिंचाई हुई।
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