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भोपाल में CREDAI,इंदौर में FDI ने किया पीएम का बेजा इस्तेमाल
ममता यादव
पिछले दिनों भोपाल में क्रेडाई द्वारा प्रापर्टी के विज्ञापनों में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के फोटो के उपयोगा का मामला तूल पकड़ा था मगर, हुआ कुछ नहीं। ऐसा ही कुछ धार जिले के पीथमपुर में एफडीआई नामक कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा किया जा रहा है। जिसके पंपलेट बकायदा इंदौर सहित आसपास के क्षेत्रों में अखबारों के साथ बांटे जा रहे हैं और इनमें प्रधानमंत्री के फोटो लगाये गये हैं। उससे भी ज्यादा हैरानी की बात ये है कि जब यहां फोन करने पर आप जानकारी मांगते हैं या यह कहते हैं कि प्रधानमंत्री का फोटो उपयोग करना गलत है तो धमकी दी जाती है कि जाईये आप रिपोर्ट करवा दीजिए।
पिछले दिनों एक राष्ट्रीय समाचार चैनल ने मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रधानमंत्री आवास योजना मामले में खुलासा किया था कि क्रेडाई को माध्यम बना नगर निगम भोपाल ने ही आवास मेले के शिविर लगवा दिये। निगम के प्रेस नोट से खुलासा हुआ था कि क्रेडिट लिन्क सब्सिडी का लाभ दिलाने के नाम पर निगम ने क्रेडाई के बने हुये मकान बिकवाने के लिये शिविर लगाये थे। ये शिविर बिना किसी लिखित अनुबंध के लगाये गये थे। इतना ही नहीं मामला इसलिये भी तूल पकड़ा क्योंकि मीडिया में जो विज्ञापन जारी किए गये वे मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के फोटो के साथ जारी किए गये।
इसी से मिलता—जुलता मामला इंदौर में भी सामने आया है जहां जमीन के जादूगर लोगों को चूना लगाने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। ताजा मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पंपलेट पर फोटो लगाकर प्लॉट और रो-हॉउस बेचने का है। पीथमपुर में एफडीआई कंस्ट्रक्शन द्वारा बनाए जा रहे ‘विश्वास नगर’ को विज्ञापित करने के लिए अखबारों के साथ परचे बंटे थे। इसमें संपर्क के लिए नंबर भी दिए गए। बात करने पर जो जानकारी मिली वो बहुत चौंकाने वाली है। बात करने वाले ये कर्मचारी न तो कॉलोनी के प्रमोटर के बारे में बताते हैं न इनके पास इस सवाल का जवाब है कि प्रधानमंत्री का फोटो लगाकर सब्सिडी देने का वादा क्यों किया गया। बताया जा रहा है कि ये कॉलोनी किसी भाजपा नेता से जुड़े कॉलोनाइजर है, इसलिए अफसर भी बचने की कोशिश कर रहे हैं।
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प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के फोटो लगाकर फ्लैट बेचने की कोशिश पिछले दिनों भोपाल में भी हुई थी। लेकिन, मीडिया में मामला उठा भी तूल भी पकड़ा मगर जिम्मेदारों ने इस तरह के दुस्साहसी लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाई। ये मामला इससे कहीं ज्यादा संगीन इसलिए है कि प्रमोटर के नाम को छुपाने की कोशिशें की गईं।
गौरतलब है कि इंदौर की सीमा से लगे धार जिले के अंतर्गत आने वाले पीथमपुर में इन दिनों जमीन के भाव आसमान छू रहे हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में कई नई कंपनियों के आने से यहाँ नई-नई कॉलोनियां कटने लगीं हैं। ऐसी ही कॉलोनी है विश्वास नगर, जिसका विज्ञापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोटो लगाकर पंपलेट के माध्यम से किया जा रहा है। इस परचे में लिखा हुआ है ‘प्रधानमंत्री योजना के अंतर्गत लोन के ऊपर 2.20 लाख की सब्सिडी। लेकिन, संपर्क करने पर ये नहीं बताया गया कि ये सब्सिडी कैसे मिलेगी? इस सवाल का जवाब भी नहीं मिल सका कि प्रधानमंत्री के फोटो का उपयोग क्यों किया गया?
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विज्ञापन के परचे पर दिए गए फोन नंबर पर जब मल्हार मीडिया द्वारा बात की गई तो किसी प्रशांत चौधरी ने जानकारी दी कि सबसे पहले 31 हज़ार रुपए जमा करके रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरना पड़ेगा, फिर किश्तें तय होंगी। लेकिन, जब कॉलोनी के प्रमोटर के बारे में जानकारी मांगी गई तो वे स्पष्ट नहीं बता सके। कहा कि आप पीथमपुर आओ, यहीं बात करेंगे। जब प्रमोटर का नाम जानने की कोशिश की गई तो प्रशांत ने टालमटोल की और किसी नम्रता से बात करवाई। नम्रता ने धमकाने वाली भाषा में जवाब दिया कि आपको नरेंद्र मोदी के फोटो से क्या मतलब, मोदी आपको प्लॉट नहीं देंगे। जब 2. 20 लाख की सब्सिडी के बारे में पूछा तो बात टाल गई। जब ये पूछा गया कि प्रधानमंत्री का फोटो लगाकर क्या किसी कॉलोनी का प्रचार किया जा सकता है, तो नम्रता का जवाब था कि आप हमारे खिलाफ रिपोर्ट लिखवा दो। किस थाने में रिपोर्ट लिखवाओगे, ये बता दो तो मैं वहीँ आ जाती हूँ।
संपर्क करने वाले कंपनी के दोनों कर्मचारियों की बातचीत से स्पष्ट नहीं हो सका कि कॉलोनी किसकी है? प्रधानमंत्री योजना के तहत सब्सिडी दिए जाने का आशय क्या है और इस कॉलोनी के पीछे कौन लोग हैं? वे कॉलोनी की वैधता को लेकर भी कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं दे सके।
भोपाल में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के फोटो लगाकर फ्लैट बेचने की कोशिश करने का मामला हाल ही में सामने आया था। इसी तरह का मामला ये भी है, लेकिन, प्रशासन ने कोशिश नहीं की, कि एफडीआई कंस्ट्रक्शन की इस योजना की परतें खोली जाए।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
जितेंद्र सिंह चौहान (एसडीएम, पीथमपुर) : ये मामला पहले भी मेरी जानकारी में आया था कि पीथमपुर में कोई कॉलोनाइजर प्रधानमंत्री का फोटो लगाकर प्लॉट और मकान बेचने कोशिश कर रहा है। मेरे पास अभी तक कोई औपचारिक शिकायत नहीं आई है। यदि शिकायत मिलती है, तो कार्रवाई की जाएगी। वैसे पीथमपुर नगर पालिका को भी कार्रवाई का अधिकार है।
मधु सक्सेना (सीएमओ नगर पालिका पीथमपुर) : विश्वास नगर कॉलोनी पीथमपुर नगर पालिका के क्षेत्र में नहीं आती! लेकिन, यदि कोई कॉलोनाइजर इसे पीथमपुर में बताकर प्लॉट और मकान बेचने की कोशिश कर रहा है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जहां तक भोपाल की बात है तो कालोनाइजर एक्ट के तहत राजधानी में 293 बिल्डरों के 3344 ईडब्लूएस और 2403 एलआईजी की सूची निगम प्रशासन के पास है। जबकि आवास मेला लगा सिर्फ 12 बिल्डरों के नाम पर। निगम चाहता तो खुद ही गरीबों को सीधे ही आवास दे सकता था ।कालोनाइजर एक्ट के तहत यह प्रशासन की ही जिम्मेदारी है। निगम के पास गरीबों की सूची भी थी। वह सीधे बैंक फायनेंस करा सकता था।
सवाल यहां भी यही उठ रहा है कि आखिर क्रेडाई की तरफ से ऐसा क्या हुआ कि सरकार ने कोई कार्रवाई ही नहीं की। यही हाल इंदौर में है। ऐसा तो है नहीं कि ये पंपलेट जिम्मेदारों तक पहुंचे नहीं होंगे। क्योंकि बकायदा अखबारों के साथ ये बांटे गये और अखबार तो सबके घर पहुंचता ही है और पढ़ा भी जाता है। बिल्डरों को मिली इस शह का कोई तो कारण होगा कि सरकार खामोश है।
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