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विज्ञापन नीति में मान्य एजेंसियो को सूची मे शामिल करने के आदेश
प्रेस कौंसिल ऑफ इंडिया की विशेष बैठक मे डीएव्हीपी की विज्ञापन नीति २०१६ पर विचार किया गया। आल इंडिया स्माल एवं मीडियम न्यूज पेपर के अध्यक्ष गुरमिंदर ने देश भर के मध्यम एवं लघु भाषाई समाचार पत्रों को उक्त विज्ञापन नीति को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि इससे लघु एवं मध्यम श्रेणी के समाचार पत्र बंद हो जाएंगे। गुरिंदर सिंह और कौंसिल के अन्य सदस्यो के बीच विज्ञापन नीति की विसंगतियो पर चर्चा हुई। यह बैठक लगभग ५ घंटे चली।
आल इंडिया स्माल एंड मीडियम न्यूज पेपर फेडरेशन के सचिव अशोक नवरत्न ने ईएमएस एजेंसी को जानकारी देते हुए कहा कि प्रेस काउंसिल आफ इंडिया ने डीएव्हीपी को सुनवाई करते हुए आदेशित किया है। कि विज्ञापन पालिसी २०१६ में निम्नानुसार संशोधन किए जाऐं।
प्रेस कौंसिल ने अपने आदेश में लिखा है कि किसी भी समाचार पत्र को एबीसी से प्रसार संख्या प्रभावित कराने सदस्यता लेने से बाध्य नहीं किया जा सकता है। कोंसिल ने कहा कि ९० दिन के अंदर यदि आरएनआई प्रसार संख्या को प्रमाणित नहीं करती है तो समाचार पत्र द्वारा प्रस्तुत प्रसार संख्या का प्रमाण पत्र वैध माना जाना चाहिए।
न्यूज एजेंसी के संदर्भ में प्रेस कौंसिल ने आदेश दिया है कि डीएव्हीपी केन्द्र और राज्य सरकार से अधिमान्य न्यूज एजेेंंसियों को भी शामिल करे। डीएव्हीपी की नीति में प्रिंटिंग प्रेस के लिए जो अंक निर्धारित किए गए है। वह गैर जरूरी है। इसी तरह कोई समाचार पत्र यदि समाज विरोधी अथवा अनैतिक गतिविधियों में शामिल पाया जाता है तो विज्ञापन नीति में उसे विज्ञापन सूची से बाहर करने का प्रावधान किया जाए।
प्रेस कौंसिल ने यह आदेश सुझावों के साथ डीएव्हीपी को भेज दिया है। डीएव्हीपी को अब प्रेस काउंसिल आफ इंडिया के आदेश और सुझाव पर निर्णय करना होगा।
इस मामले में डीएव्हीपी से इस संबंध में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है। प्रेस काउंसिल आफ इंडिया के आदेश की अधिकृत प्रति भी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। बैठक में जो सदस्य शामिल थे उनसे प्रेस काउंसिल के आदेश और अनुशंसा के संबंध में जानकारी एजेन्सी को प्राप्त हुई है।
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