Patrakar Vandana Singh
कान्हा-पेंच में मरे सबसे ज्यादा बाघ
मध्यप्रदेश के टाइगर रिजर्व में रहने वाले बाघों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। इस साल आठ माह के पहले ही राज्य ने 21 बाघ खो दिये हैं। सबसे ज्यादा बाघ पेंच और कान्हा टाइगर स्टेट में 14 की संख्या में मरे हैं। इनमें अवैध शिकार के मामले भी शामिल हैं। बाघों के संरक्षण के नाम पर वन्यप्राणी विभाग करोड़ों रुपये खर्च कर चुका है फिर भी टाइगर्स को बचाने ठोस उपाय नहीं हैं।
वन्यप्राणियों के लिए एमपी बड़ा ठिकाना बनता जा रहा है। पेंगोलिन का शिकार आसानी से हो रहे हैं। वन महकमा ने इनके शिकार के मामले में सौ से अधिक आरोपी गिरफ्तार करने का दावा किया है। शिकार में एक आरोपी अंतरराष्टÑीय स्तर का है। राज्य में बाघों की मौत का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। इस साल के जनवरी से 11 अगस्त तक 21 बाघों की मौत हो चुकी है। विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार पेंच टाइगर रिजर्व के अन्तर्गत सात बाघ मर चुके हैं। मौत के पीछे प्रमुख कारण आपसी लड़ाई और जल स्त्रोत में जहर घोलने व जहर घुला हुआ पानी पीने से मौत होना बताया जा रहा है। जनवरी में एक ऐसा भी मृत बाघ बरामद किया जा चुका है कि जो कई दिनों तक घाव के कारण परेशान था और बाद में संक्रमण से मौत हो गई।
टाइगर रिजर्व और वन मंडल अंतर्गत सबसे ज्यादा 11 की संख्या में नर बाघों की मौत हुई है। जबकि मादा बाघों की संख्या पांच है। चार शावक भी काल के गाल में समाए हैं। इनकी आयु 2 से 11 साल के बीच है। सभी बाघ मृत अवस्था में मिलना बताया गया है तथा मौत का कारण आपसी लड़ाई के चलते अन्य वयस्क बाघ के द्वारा मारे जाना कहा जा रहा है।
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