म.प्र के हालात सार्क देशों से भी ख़राब
madhyprdesh garibi

 

यूनिसेफ की रिपोर्ट में खुलासा 

 

हाल ही में यूनिसेफ की मध्यप्रदेश राज्य एमडीजी की रिपोर्ट ने प्रदेश सरकार के  दावे की पोल खोलकर रखदी है । रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्यप्रदेश सरकार गरीबी, अशिक्षा, ख़राब स्वास्थ की स्थित, महिलाओं के लिए प्रतिकूल बातावरण को दूर करने के अपने वादे से चूक गई है ।

 

यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश आज भी बीमारू राज्य की श्रेणी में खड़ा हुआ है और सरकार का विकास का दावा कोसों दूर है ।पिछले एक दशक में जहाँ देश में गरीबों की संख्या में 23.4% कमी दर्ज हुई वहीँ मध्यप्रदेश में यह गिरावट महज 11.1% रही है । सामाजिक क्षेत्र में की जारही अनदेखी को इसकी प्रमुख बजह माना गया है । मध्यप्रदेश में गरीबों की संख्या 2.28 करोड़ है जो पाकिस्तान में रह रहे  गरीबों के बराबर है ।

 

मध्यप्रदेश में लैंगिक असमानता पाकिस्तान, अफगानिस्तान को छोड़कर सभी सार्क देशों से ज्यादा है । शिशु और मातृ मृत्यु दर में हमारा प्रदेश श्रीलंका, भूटान, नेपाल और बांग्लादेश से भी आगे है तो गर्भ निरोधक के उपयोग एवं स्वच्छ पेयजल की उपलब्धि और साफ सफाई में केवल अफगानिस्तान से ही बेहतर है । ये हालात इसलिए बने है क्योंकि हमारी सरकार स्वास्थ, शिक्षा, पोषण जैसे सेक्टरों पर खर्च ही कम करती है ।शोसल सेक्टर पर मध्यप्रदेश अपने बजट का 39% खर्च करता है तो छत्तीसगढ़ 46%, बिहार 45%, उड़ीसा 42% और उत्तरप्रदेश 41%,  इसपर राष्ट्रीय खर्च औसत भी 42% है । 

 

हमारे प्रदेश की जनता और बुद्धिजीवियों को अब आँखे खोलना चाहिए और लुटेरों डकैतों के इस गिरोह के चंगुल से राज्य को बाहर निकालना होगा बरना झूठ पर विश्वास करते करते विकास की दौड़ में बहुत पीछे छूट जायेंगे ।

Dakhal News 19 August 2016

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