Patrakar Priyanshi Chaturvedi
मध्यप्रदेश के 192 इंजीनियरिंग कॉलेजों में से 60 कॉलेजों की लगभग 200 ब्रांच में एक भी एडमिशन नहीं हुआ। इंजीनियरिंग के 14 कॉलेज ऐसे हैं, जिनका खाता भी नहीं खुल पाया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अब तक छात्रों में लोकप्रिय रहे आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी ब्रांचों में भी एडमिशन शून्य हैं। इनमें भोपाल के 6 कॉलेज शामिल हैं। वहीं 50 से अधिक कॉलेज ऐसे हैं, जिनकी अधिकतर ब्रांच में एक या दो एडमिशन हुए हैं। इससे अगले सत्र के पहले कॉलेजों का बंद होना तय है।
इंजीनियरिंग कॉलेजों की खाली 78 हजार सीटों में से अब तक करीब 32 हजार सीटों पर एडमिशन हुए हैं।एडमिशन की प्रक्रिया पिछले दो महीने से चल रही है। इस बार शासन ने इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन बढ़ाने के लिए जमकर प्रचार-प्रसार भी किया था। इसके बाद भी स्थिति में सुधार नजर नहीं आया। सबसे खराब स्थिति उन कॉलेजों की है, जिनमें एक भी एडमिशन नहीं हुआ है या फिर 1 या दो एडमिशन हुए हैं।
जिन कॉलेजों में 1 या दो एडमिशन हुए हैं, उनके सामने छात्रों को पढ़ाने और शिक्षकों का वेतन निकालने तक का संकट रहेगा। ऐसे में तय है कि अगले सत्र के पहले ये कॉलेज बंद हो जाएंगे। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने कॉलेजों को अपनी सीटें भरने के लिए कॉलेज स्तर काउंसलिंग का मौका दिया है, लेकिन इसमें भी कॉलेजों की स्थिति सुधारने की उम्मीद नहीं है।
राजधानी के छह कॉलेजों में जीरो एडमिशन
राजधानी के क्रीसेंट, आईस्कोम, कैलाश नारायण पाटीदार, आरकेडीएफ 2009 और स्र्कमणी देवी कॉलेज में 1 भी एडमिशन नहीं हुआ है। इसके अलावा करीब 20 कॉलेज ऐसे हैं, जिनकी 5 या 10 एडमिशन ही हुए हैं। प्रदेश में ऐसे कॉलेजों की 100 से अधिक होगी, जिनमें एडमिशन की स्थिति बेहद खराब है।
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