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शक्कर 5 दिन में 6 रुपए किलो महंगी
पिछले पांच दिनों में चीनी के दाम में हुई छह रुपए प्रति किलो तक की वृद्धि ने सरकार की नींद उड़ा दी है। उपभोक्ता मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, बीते 5 अगस्त को चीनी 36 रुपए प्रति किलो थी, जबकि बुधवार को कीमत 42 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई। सरकार को डर है कि कीमत पर जल्द अंकुश न लगाया गया, तो त्योहार में चीनी और महंगी हो सकती है। इस बीच,चीनी की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने बाजार नियामक सेबी को इसके वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगाने को कहा है। इस साल चीनी की उत्पादन भी करीब 7 फीसदी कम रहने का अनुमान है। साथ ही सरकार चीनी पर लगने वाले 40 प्रतिशत आयात शुल्क भी घटाकर 25 करने पर भी विचार कर रही है। सरकार चीनी मिलों पर स्टॉक सीमा लागू करने पर भी विचार कर रही है। अभी तक चीनी मिलों पर कोई स्टॉक सीमा नहीं है। कई एजेंसियों से यह जानकारी मिली है कि चीनी मिलों ने चीनी को स्टॉक कर लिया है। वह बाजार में चीनी मुहैया नहीं करा रहे हैं।
खुदरा 6%, खाद्य महंगाई 8.25% :जेब पर बढ़ते बोझ की ताकीद खुद सरकारी आंकड़ों ने कर दी है. सांख्यिकी मंत्रालय ने जानकारी दी है कि जुलाई के महीने मे खुदरा महंगाई दर छह फीसदी के पार चली गई है जो 23 महीने का सबसे ऊंचा स्तर है। ज्यादा चिंता इस बात की भी है कि खाद्य पदार्थों की खुदरा महंगाई दर 8 फीसदी से भी ज्यादा हो गई। जुलाई के महीने में खुदरा महंगाई दर 6 .07 फीसदी रही जबकि जून के महीने में ये दर 5.7 फीसदी थी।
शकर कंपनियां हो गई मालामाल : इस साल की शुरुआत से अब तक बीएसई में मुनाफा कमाने वाली 100 कंपनियों में 19 चीनी की हैं। इनमें से 15 के शेयरों के दाम छह माह में ही दोगुना हो गए हैं। मंत्रलय के एक अधिकारी ने बताया कि वायदा कारोबार और आयात शुल्क से संबंधित फाइल खाद्य मंत्री रामविलास पासवान के कार्यालय को भेज दी गई है। इस पर जल्द फैसला हो सकता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चीनी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए महंगाई पर काबू पाने के लिए गठित अंतरमंत्रालीय समिति ने भी आयात शुल्क में कटौती का सुझाव दिया है।
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