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सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने उन मल्टी-सिस्टम ऑपरेटरों (एमएसओ) को खोज निकालने में ब्रॉडकास्टरों की मदद मांगी है जिन्होंने अभी तक डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (डैस) चौथे चरण के इलाकों में लाइसेंस के लिए आवेदन तक नहीं किया है।
हाल की डैस टास्क फोर्स की बैठक के दौरान, प्रसारण मंत्रालय की संयुक्त सचिव (ब्रॉडकास्टिंग) आर जया ने ब्रॉडकास्टरों के प्रतिनिधियों से कहा कि चौथे चरण के लिए 7 अगस्त तक लाइसेंस के लिए आवेदन नहीं करने वाले एमएसओ की सूची वे मंत्रालय को भेजे। जया ने कहा कि मंत्रालय ने 965 एमएसओ पंजीकरण अब तक जारी किए हैं और लगभग 200 आवेदन प्रक्रिया के तहत हैं।
ट्राई की रिपोर्ट के अनुसार चूंकि देश में करीब 6000 एमएसओ हैं, यह स्पष्ट है कि एमएसओ की एक बड़ी संख्या ने एमएसओ पंजीकरण के लिए अब तक आवेदन नहीं किया है। जया ने कहा कि ब्रॉडकास्टरों के पास चौथे चरण के क्षेत्रों में परिचालन करने वाले सभी एमएसओ की जानकारी होनी चाहिए। इस विवरण को प्रसारण मंत्रालय की वेबसाइट पर पंजीकृत एमएसओ की सूची के साथ मिलान कर पहचाना जा सकता है कि किन एमएसओ ने अभी तक पंजीकरण के लिए आवेदन नहीं किया है।
उन्होंने कहा कि अगले कदम के रूप में ब्रॉडकास्टर इन एमएसओ के साथ संवादकर सकते हैं और एमएसओ को कह सकते हैं कि अगर वे डैस-अधिसूचित क्षेत्रों में एमएसओ के रूप में परिचालन जारी रखना चाहते हैं तो पंजीकरण के लिए आवेदन कर लें।
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के प्रतिनिधि एस के सिंघल ने कहा कि 900 टीवी चैनलों में से करीब 600 चैनल फ्री टू एयर (एफटीए) हैं और 2,000 स्थानीय केबल ऑपरेटर (एलसीओ) उनके हेडएंड्स से इन चैनलों को डिस्ट्रीब्यूट करते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें इन एलसीओ से कह सकती हैं कि एमएसओ पंजीकरण के लिए आवेदन करें। प्रसारण मंत्रालय ने इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन (आईबीएफ), न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) और एसोसिएशन ऑफ रीजनल टेलिविज़न ब्रॉडकास्टर्स ऑफ इंडिया (एआरटीबीआई) से अनुरोध किया है कि वे अपने सदस्यों को बताएं कि उनके जिन एमएसओ के साथ इंटरक्नेक्ट करार हैं उनसे पूछे कि क्या उन्होंने मंत्रालय से चौथे चरण के लिए एमएसओ पंजीकरण लिया है। ऐसे मामले में जहां एमएसओ ने पंजीकरण के लिए आवेदन नहीं किया है, ब्रॉडकास्टरों को उन्हें तुरंत आवेदन करने की सलाह देने के लिए कहा गया है।
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