भोपाल के नेहरू नगर में खुली गेहूं की पोल
भोपाल के बाढ़ प्रभावितों को वितरित किए जाने वाले अनाज में मिट्टी ही मिट्टी होने पर आज विधानसभा के अंदर और बाहर जमकर हंगामा हुआ। सदन के अंदर जहां कांग्रेस के विधायकों ने हंगामा किया तो परिसर के बाहर पार्षद और कांग्रेस के अन्य नेताओं ने सरकार को घेरा। हंगामे के बीच विधानसभा की कार्रवाई गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। मध्यप्रदेश में 2967 केंद्रों पर 9.57 लाख टन गेहूं खरीदा गया, लेकिन अब इसमें भारी मात्रा में मिट्टी निकल रही है। मंगलवार को नेहरू नगर के बाढ़ पीड़ितों को बांटे गए गेहूं ने पूरी व्यवस्था की पोल खोल दी। इससे सोसायटी से लेकर नागरिक आपूर्ति निगम, कांट्रेक्टर से लेकर कर्मचारी और अधिकारी सब कटघरे में हैं। सवाल यह है कि आखिर किसानों से खरीदा गया सोना जैसे गेहूं में मिट्टी कैसे और कहां मिलाई गई।
बाढ़ प्रभावितों को वितरित किए जाने वाले अनाज में मिट्टी ही मिट्टी होने पर आज विधानसभा के अंदर और बाहर जमकर हंगामा हुआ। सदन के अंदर जहां कांग्रेस के विधायकों ने हंगामा किया तो परिसर के बाहर पार्षद और कांग्रेस के अन्य नेताओं ने सरकार को घेरा। हंगामे के बीच विधानसभा की कार्रवाई गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
बाढ़ प्रभावित को लोगों को मिट्टीयुक्त गेहूं वितरित किए जाने पर आज कांग्रेस विधायक जयवर्द्धन सिंह और अन्य विधायकों ने मुद्दे को उठाया। कांग्रेस पार्षद मोनू सक्सेना और अन्य नेताओं ने भी मिट्टी वाले गेहूं के सेम्पल लेकर सरकार को घेरा। बीजेपी विधायक बाबूलाल गौर ने इस मुद्दे पर अपनी सरकार को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास किया। इस पर संसदीय मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने घोषणा की कि पूरे मामले की जांच के लिए एक कमेटी बनाई जाएगी जो मानसून सत्र के अंतिम अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।
10879 करोड़ का है गेहूं सवाल बहुत, जवाब एक, जारी है जांच
ऐसी है गेहूं खरीदी और सप्लाई की चेन, तो कहां हुई मिलावट
1 किसान गेहूं लेकर सोसायटी पहुंचा
सबसे पहले किसान अपना गेहूं बेचने के लिए सोसायटी पहुंचते हैं। यहां खुला गेहूं लिया जाता है यानि किसानों की ओर से मिलावट नहीं हुई।
2 सोसायटी में गेहूं की पैकिंग
किसानों से गेहूं खरीदने के बाद सोसायटी में अफसरों की मौजूदगी में पैकिंग होती है। अगर लापरवाही हुई तो यहां मिट्टी मिलाई जा सकती है।
3 गेहूं गोदामों के लिए रवाना
सोसायटी से ट्रकों में भरकर गेहूं गोदाम भेजा जाता है। इस बीच कांट्रेक्टर और अफसरों की मिलीभगत से गेहूं में मिट्टी मिलाई जा सकती है।
4 वेयर हाउस जमा होता है गेहूं
ट्रकों से लाया गया गेहूं वेयर हाउस में जमा होता है। यह अधिकारियों की देखरेख में होता है। यहां भी लापरवाही या मिलीभगत से मिलावट हो सकती है।
5 अब शुरू हुई राशनिंग
अंत में गेहूं राशन की दुकान पर पहुंचता है। यहां भी मिलावट की आशंका है, पर चूंकि ताजा मामले में सीलबंद बोरी में मिट्टी मिली है इसलिए इन पर उंगली फिलहाल नहीं उठ रही है।
जांच के बाद निकलता है गेहूं
नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा सप्लाई किए जाने वाले गेहूं को जांच कमेटी की जांच के बाद ही वेयर हाउस से बाहर निकाला जाता है, लेकिन इस बार जो गेहूं बांटा गया उसकी किसी भी स्तर पर जांच नहीं की गई। निगम की जांच कमेटी में एक विभागीय अधिकारी और एक फूड इंस्पेक्टर होता है।
फिलहाल रोका वितरण
बाढ़ पीड़ितों के गेहूं में मिट्टी मिलने की घटना सामने आने के बाद वितरण रोक दिया गया है। अब गेहूं की पहले जांच होगी फिर बंटेगा। जिम्मेदार लोगों को भी जिला प्रशासन द्वारा चिह्लित किया जा रहा है, ताकि स्पष्ट हो सके कि मिलावट किस स्तर पर हुई है।