मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के तीन शहर (इंदौर, भोपाल और रायपुर) आयकर विभाग के राडार पर हैं। विभाग का मानना सबसे ज्यादा कालाधन यहीं दबाकर रखा गया है। विभाग ने देशभर में जून से सितंबर तक 45 प्रतिशत टैक्स देकर कालेधन को वैध करने की योजना लागू की है, लेकिन दोनों राज्यों में कोई भी नंबर दो की संपत्ति उजागर करने सामने नहीं आया। सितंबर के बाद आयकर विभाग सख्त कार्रवाई करेगा।
ये जानकारी आयकर विभाग के प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर अबरार अहमद ने दी। उन्होंने बताया कि सरकार ने कालेधन के खिलाफ मुहिम छेड़ी है। इसके लिए 1 जून से 30 सितंबर तक कोई भी अपनी चल-अचल संपत्ति का विभाग के समक्ष खुलासा कर दे, उस पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। इसके बाद आयकर विभाग ने कालाधन रखने वालों पर मुकदमा चलाने जैसी सख्त कार्रवाई की योजना बनाई है।
उन्होंने बताया कि बदलती टेक्नोलाजी के दौर में विभाग के पास अब ऐसे संसाधन हैं, जिनके सहारे हमारे पास किसी भी व्यक्ति अथवा संस्थान की 360 डिग्री की प्रोफाइलिंग तैयार हो जाती है। इसकी मदद से कालेधन को ढूंढना बहुत आसान हो जाएगा। अगले 3-4 साल बाद देश के भीतर होने वाला कोई भी ऐसा बड़ा लेनदेन विभाग की नजरों से छिप नहीं सकेगा।
उन्होंने बताया कि करदाताओं को टैक्स चोरी के लिए प्रोत्साहित करने वाले चार्टर्ड एकाउंटेंट और टैक्स सलाहकार वकीलों पर भी विभाग सख्ती करेगा। उनके रजिस्ट्रेशन आदि निरस्त कराने की कार्रवाई होगी। अब तक कितने लोगों पर कार्रवाई हुई? इस सवाल का जवाब वह टाल गए। उन्होंने यह जरूर स्वीकार किया कि काली भेड़ें हर जगह मिल जाती हैं इसलिए ऐसे लोगों पर विभाग एफआईआर दर्ज कराएगा।उन्होंने बताया कि ऐसे लोग कालेधन को घोषित नहीं कर पाएंगे जिन्हें विभाग नोटिस दे चुका है। कोफेपोसा, नार्कोटिक्स, फेमा अथवा प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत यदि कार्रवाई चल रही है। यदि विभाग को अंधेरे में रखकर ऐसी संपत्ति का खुलासा करता है तो उसका टैक्स जब्त हो जाएगा।