मध्यप्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में आगामी सत्र से एनआरआई कोटा खत्म करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए 2016-17 के एमबीबीएस व बीडीएस प्रवेश नियमों में बदलाव का प्रस्ताव है। मेरिट में आने वाले छात्रों को दाखिला दिलाने के लिए यह कवायद की जा रही है।
प्रदेश के सभी छह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस कोर्स में एनआरआई कोटे की 28 सीटें हैं। इन सीटों पर दाखिले के लिए पिछले साल तक संचालनालय चिकित्सा शिक्षा अलग से प्रवेश परीक्षा कराता था। इस साल से सभी एडमिशन नीट के जरिए होने हैं। इसके लिए अलग से मेरिट बनानी होगी। लिहाजा, संचालनालय चिकित्सा शिक्षा इन सीटों पर दाखिले के लिए नियम बदलने की तैयारी में है। मेडिकल यूजी पाठ्यक्रम के प्रस्तावित प्रवेश नियमों में एनआरआई कोटा खत्म करने विधि विशेषज्ञों व मेडिकल कॉलेजों के डीन से राय ली जा रही है। कोटा खत्म करने के पीछे संचालनालय का तर्क है कि इससे मेरिट में आने वाले छात्रों को दाखिला मिलेगा। अभी एनआरआई उम्मीदवार के परीक्षा में बहुत कम अंक होने के बाद भी उसे दाखिला मिल जाता है। इसके उलट एआईपीएमटी से मेरिट में आने वाले उम्मीदवार को भी एडमिशन नहीं मिल पाता है।
संचालनालय के अधिकारियों ने बताया कि एनआरआई कोटा शुरू करने का मकसद कॉलेजों की आय बढ़ाना था। इनकी फीस करीब 12 हजार डालर प्रति साल है। यानी, हर साल एक छात्र की फीस 25 लाख रुपए होती है। दूसरे छात्रों से कॉलेजों को सिर्फ 35 हजार रुपए साल मिलते हैं। लेकिन, इसका बड़ा नुकसान यह था कि प्रतिभावान छात्रों की जगह एनआरआई कोटे के तहत मोटी रकम देने वाले छात्रों को दाखिला मिल जाता था।
संचालनालय चिकित्सा शिक्षा के अधिकारियों ने बताया कि यूजी काउंसलिंग के दौरान निजी कॉलेज में दाखिला लेने वाले छात्रों को फीस के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। अनुसूचित जाति व अनुसूचित कल्याण विभाग की ओर से इन छात्रों की फीस शुरू में ही जमा करा दी जाएगी। अभी तक छात्रों को शुरू में खुद फीस जमा करना पड़ती थी बाद में उन्हें सरकार से फीस की राशि मिलती थी। इस वजह से दाखिले के समय उन्हें दिक्कत आती थी। निजी कॉलेज बिना पूरी फीस लिए एडमिशन देने को तैयार नहीं होते थे।
संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ जीएस पटेल ने कहा एनआरआई कोटे में प्रतिभावान छात्रों की जगह कम अंक वाले उम्मीदवारों को भी एडमिशन मिल जाता है, इसलिए एनआरआई कोटा खत्म किया जा सकता है। सभी डीन से राय ली जा रही है। इस पर निर्णय सरकार को करना है।