भ्रष्टाचार का वध सियासत से
भ्रष्टाचार का वध सियासत से
शरद यादव आज भ्रष्टाचार के खिलाफ देश में जो माहौल बना है, वह निश्चय ही बहुत बड़ी बात है । हमें इस मौके को बर्बाद नहीं करना चाहिए । लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई सही तरीके से लड़ी जानी चाहिए । आज कुछ लोग अनशन और भूख हड़ताल को इसके खिलाफ लड़ाई का हथियार बना रहे हैं । मेरा मानना है कि यह गलत तरीका है । अनशन में मुद्दा पीछे छूट जाता है और अनशन करने वाले आदमी पर सारा ध्यान केन्द्रित हो जाता है। मुद्दे को पीछे छोड़कर हम कुछ हासिल नहीं कर सकते । महात्मा गांधी ने अनशन का हथियार के रूप में इस्तेमाल किया था, लेकिन महात्मा जी का मामला अलग था और तब देश की हालत भी भिन्न थी । सही तरीका चुनें :- आजादी के बाद लोहिया जी ने कभी अनशन का सहारा नहीं लिया । जयप्रकाश जी ने भी इसे आन्दोलन का माध्यम नहीं बनाया । सांप्रदायिकता के खिलाफ हमारे नेता वी.पी. सिंह ने अनशन किया था, तो उनकी किडनी ही खराब हो गई और उन्हें उसके कारण सक्रिय राजनीति से हट जाना पड़ा । अनशन के अलावा आन्दोलन के अन्य तरीके हैं, जिनका इस्तेमाल करके सरकार और समाज पर दबाव बनाया जाना चाहिये । भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए हमें इसके स्वरूप को समझना पड़ेगा । यह सत्ता की ही बुुराई नहीं है, बल्कि एक सामाजिक बुराई भी है । यह हमारी सामाजिक व्यवस्था से निकलता है, इसलिए हमें उसके स्तर पर भी इसका निराकरण करना होगा । विपक्ष का दबाव :- आजादी के बाद हमारे देश में भ्रष्टाचार बढ़ता गया है । जहां-जहां सरकारी योजनाएं पहुंचती हैं, वहीं उसके साथ भ्रष्टाचार भी पहुंच जाता है । किस योजना में भ्रष्टाचार नहीं है ? चाहे वह महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना हो, इंदिरा गांधी आवास योजना हो या सार्वजनिक वितरण प्रणाली, सब में भ्रष्टाचार है । सरकाारी कार्यालयों से काम करवाने के लिए भ्रष्टाचार के आगे सिर झुकाना पड़ता है । यह इतना व्यापक हो गया हैकि इसका होना नियम है और न होना अपवाद । लेकिन पिछले कुछ महीनों से भ्रष्टाचार के जो मामले सामने आए हैं आर उनमें जो बड़ी राशि शामिल है, उसने देश के लोगों के दिलोदिमाग को झकझोर दिया है। राष्ट्रमंडल खेलोें के दौरान हजारों करोड़ रूपयों की लूट । २ जी स्पेक्ट्रमें १ लाख ७० हजार करोड़ रूपये का सरकारी खजाने को नुकसान । उपग्रह स्पेक्ट्रम में २ लाख करोड़ रूपये का नुकसान करने वाले सौदे व भ्रष्टाचार के मुकदमे का सामान करने वाले एक व्यक्ति की सीवीसी के रूप में नियुक्ति ने हमें हिलाकर रख दिया है । भ्रष्टाचार के इन मामलों पर सरकार ने जो प्रतिक्रिया दिखाई, वह भी लोगों को परेशान करने वाली रही । प्रधानमंत्री की छवि एक ईमानदार व्यक्ति की है और माना जाता है कि अपनी ईमानदारी के कारण ही वह इस पद पर पहुँचे हैं । लेकिन उनके नेतृत्व में बनी सरकार में इतना भ्रष्टाचार हो तो, लोगों के हाश उड़ेंगे ही । भ्रष्टाचार का अंत राजनैतिक प्रक्रिया के इस्तेमाल से ही होगा । यह सोचना गलत है कि राजनैतिक लोगों को अलग-थलग करके इसके खिलाफ लड़ाई लड़ी जा सकती है । आज भ्रष्टाचार के खिलाफ जो माहौल बना है, वह राजनैतिक पार्टियों द्वारा पैदा किए गए दबाव की भी देन है । विदेशों में जमा काले धन को वापस लाने का मुद्दा पिछले लोकसभा चुनाव के पहले सबसे पहले मैने उठाया था । उसके बाद बीजेपी के सर्वोच्च नेता लालकृष्ण आडवाणी जी ने उठाया । फिर बाबा रामदेव अपने योग शिविर में इसकी चर्चा करने लगे । नगरों, महानगरों और राष्ट्रीय राजमार्गो के आसपास की जमीन पर भू-माफियाओं की नजर के खिलाफ भी मैने देश के लोगों को चेताया था । अन्य राजनैतिक दल भी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं । यह कहना गलत है कि बाबा रामदेव और अन्ना हजारे जैसे गैर राजनैतिक लोगों के कारण भी भ्रष्टाचार के खिलाफ लोग उठ खड़े हुए हैं । सच तो यह है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उन दोनों के अनशन करने के पहले ही अनेक प्रभावशाली लोग २ जी स्कैम में जेल में पहुँच चुके हैं । राजनैतिक दबाव के तहत मुकदमे दर्ज हुए । अदालतों का भी उसमें योगदान राहा । सुप्रीम कोर्ट द्वारा केन्द्र सरकार को लगाई गई लताड़ की हम अनदेखी नहीं कर सकते । पिछले साल देश की सभी विपक्षी पार्टियों ने करप्शन के सवाल को लेकर सफल भारत बन्द करवाया था । आईपीएल घोटाले में राजनैतिक दलों के दबाव के कारण शशि थरूर को मंत्रिपरिषद से बाहर जाना पड़ा था । २जी स्पेक्ट्रम स्कैम में जेपीसी की मांग करते हुए पूरे विपक्ष ने संसद के शरद सत्र को ही नहीं चलने दिया था । देशभर में हम जेपीसी के गठन की मांग को बुलंद कर रहे थे और संसद के बजट सत्र पर भी खतरा पैदा हो रहा था । उसके कारण सरकार दबाव में आई थी और जेपीसी का गठन भी हो गया । इसमें मीडिया की भी बजर्दस्त भूमिका रही । उसने भ्रष्टाचार के मामले को अच्छा कवरेज दिया । भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम उठाने में संसद की सर्वोपरि भूमिका की कोई भी अनदेखी नहीं कर सकता । हमें संसद पर भरोसा करना चाहिए । भ्रष्टाचार के खिलाफ जो सवाल खड़े हो रहे हैं, उनका हल अंततः संसद से ही निकलना है । लोकतंत्र की मजबूती :- सिविल सोसाइटी व विभिन्न संस्थाओं से जुड़े लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ आगे आएं । वे इसके खिलाफ अभियान चलाएं व जनता को जागरूक करें । वे सरकार पर तेजी से काम करने के लिए दबाव बनाएं । यह सब अच्छी बात है और हमारे देश के लोकतंत्र के मजबूत होते जाने के संकेत हैं । इनसे देश की राजनैतिक प्रक्रिया और भी स्वस्थ होती है । पर भ्रष्टाचार के जिस राक्षस का हम सामना कर रहे हैं, उसका वध तो अंततः राजनैतिक प्रक्रिया के तहत होना है । (दखल)( लेखक एनडीए के संयोजक हैं )
Dakhal News 22 April 2016

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