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महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन शानदार रहा। खासतौर पर मुंबई महानगर पालिका के परिणामों को नोटबंदी के फैसले से जोड़कर देखा जा रहा था। भाजपा को यहां मिली बंपर सीटों के बाद कहा जा रहा है कि देश की आर्थिक राजधानी ने भी नोटबंदी पर मुहर लगा दी है।
वैसे नोटबंदी के बाद देश में आठ स्थानों पर स्थानीय निकाय चुनाव हुए हैं। सभी में भाजपा को जबरदस्त कामयाबी मिली है। इसके बाद पार्टी नेता दावा कर रहे हैं कि नोटबंदी के साहसिक फैसले को जनता ने सराहा है। एक नजर 8 नवंबर को लागू नोटबंदी के बाद हुए चुनावों और उनके परिणामों पर -
ओडिशा- यहां भाजपा का ज्यादा जनाधार नहीं है, फिर भी बीते दिनों हुए पंचायत चुनाव में पार्टी को भारी जीत मिली। कुल 537 पंचायतों में से 180 पर भाजपा की जीत हुई। इसे बड़ा उलटफेर माना जा रहा है।
गुजरात- पिछले साल नवंबर में गुजरात निकाय चुनाव हुए थे। जिला पंचायत, तहसील पंचायत और नगरपालिका की 125 सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा को 109 सीटें मिलीं। पिछले चुनावों में यह आंकड़ा 64 था। कांग्रेस की सीटें पहले से घटकर 52 से 16 रह गईं।
राजस्थान- पिछले साल दिसंबर में हुए पंचायत और नगर निकाय चुनाव भाजपा ने 37 में से 19 सीटों पर जीत दर्ज की।
चंडीगढ़- यहां के नगर निगम चुनाव में भाजपा ने 26 में से 20 सीटों पर कब्जा जमाया। यहां भाजपा को 20 साल बाद बहुमत मिला।
मध्यप्रदेश- जनवरी में हुए नगर परिषद चुनाव में भाजपा ने 35 में से 30 सीटों अपना झंडा लहराया, जबकि कांग्रेस ने 4 सीट पर जीत दर्ज की।
फरीदाबाद- बीती जनवरी को हुए फरीदाबाद नगर निगम चुनाव में भाजपा 40 में से 30 वार्ड पर जीत दर्ज की।
महाराष्ट्र- नवंबर 2016 में भाजपा को महाराष्ट्र निकाय चुनावों में बड़ी कामयाबी मिली। 52 नगर परिषदों पर पार्टी ने कब्जा किया, वहीं उसके 851 नगर पंचायत सदस्य भी जीते।
महाराष्ट्र -अब प्रदेश की दस महानगरपालिकों में से भाजपा ने आठ पर अपने दम पर बहुमत हासिल किया है।
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