नेताओं को गप्प पसंद है...
राघवेंद्र सिंह

राघवेंद्र सिंह

 

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आमिर खान की सुपर डुपर फिल्म थ्री इडीयट्स  में जब आमिर खान ने इंजीनियरिंग कर रहे वाइल्डलाइफ फोटोग्र्राफी के शौकीन फरहान कहा था कि तुम्हारे पास एक मौका है अपने जुनून को पूरा करने का कि मशहूर वाइल्डलाइफ फोटोग्र्राफर का आफर तुम्हारे पास है, तुम चाहो तो इसे स्वीकार अपनी जिंदगी को खुशी और संतोष के साथ जी सकते हो। अवसर तो कांग्र्रेस के सामने भी है कि वह जनता के लिये संघर्ष कर अगले चुनाव में एंटीइंकम्बेंसी का लाभ उठाये और 15 साल बाद सरकार में आने का मार्ग प्रशस्त करे। इसी तरह सरकार में बैठे लोगों के पास चुनावी वादों को पूरा करने के लिये दो साल का वक्त है, वे चाहें तो वादे पूरे कर  जनता के सामने खरे उतर सकते हैैं। नहीं तो गप्पे हांक कर फिर सरकार में आने की कोशिश कर सकते हैैं लेकिन हर बार जनता रूपी भगवान अपने पुजारियों की गप्प स्वीकार करेगी यह जरूरी नहीं क्योंकि जनता को गप्प पसंद नहीं है।

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सियासी दस्तूर सा बन गया है आसमानी, सुल्तानी बातें करने और आकाश से चांद तारे लाने के वादों का। चुनाव के वक्त ये बातें गप्पों में तब्दील होने लगती हैं। जैसा चुनाव और जितनी विशाल सभा, बातें, वादे और गप्पें भी उसी अनुपात में। लोकसभा चुनाव से लेकर यूपी पंजाब समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव तक यही हाल है। काला धन भारत लाने से लेकर 15 लाख रुपये हरेक के खाते में जमा होने की बातें हर साल लाखों नौकरियां दिलाने के वादे, ये सब जुमलों और गप्पों में तब्दील हो चुके हैैं। नेशनल सीन पर आये नये-नये नेताओं के श्रीमुख से सुने वादे पूरे न होने से गप्पों में बदल रहे हैैं। एक फिल्म आई थी सुल्तान, उसमें गाना था बेबी को बेस पसंद है। सरकार में आने के लिये बड़े वादे तो सुनते आये हैैं मगर सरकार में आने के बाद अगर ऐलान किया जाये और उस पर अमल नहीं हो तो क्या कहेंगे उसे?

केंद्र सरकार के वजीरे खजाना अरूण जेटली ने वादा किया है कि 2022 याने पांच साल में कृषि आय दोगुनी कर दी जायेगी। कैसे करेंगे? इस  पर उन्होंने कोई रोशनी नहीं डाली है। मगर सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले वेतनमान और महंगाई की जो रफ्तार है उसके मद्देनजर गेहूं दाल के भाव स्वत: ही 50 फीसदी बढ़ जायेंगे। खेती को लाभ का धंधा बनायेंगे किसानपुत्र शिवराज सिंह चौहान दस साल से ऐसी बातें कर खूब तालियां बटोर रहे हैैं।  हकीकत यह है कि खुद मुख्यमंत्री को अपने खेत के टमाटर कम भाव होने के कारण फ्री में बेचने पड़े और फलदार वृक्ष खेत से उखाडऩे पड़े।  ऐसे में खेती को लाभ का धंधा बनाने और ककृषि आय को दोगुनी करने की बातों को गप्प से अलग शब्द बशर्ते अपशब्द न हो खोजना चाहिये क्योंकि कभी मुख्यमंत्री के संसदीय क्षेत्र रहे विदिशा के गंजबासौदा क्षेत्र में कर्ज में डूबे एक किसान ने आत्महत्या करने के पहले लिखा था मेरे जैसे पचास किसान मरेंगे लगता तब जागेगी सरकार। अब यहां से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज सांसद हैैं। इसलिये लगता है नेताओं को गप्प पसंद है।

इसी तरह समूचे प्रदेश में बच्चों के कुपोषित होने की तादाद बढ़ रही है, उनकी मौतों पर सरकार नि:संकोच बड़ी-बड़ी बातें कर रही है। मसलन कुपोषण दूर करने बजट बढ़ा रहे हैैं, अफसरों की टीम फील्ड में भेज रहे हैैं, अस्पतालों में इलाज के पुख्ता प्रबंध किये जा रहे हैैं, बगैरहा बगैरहा....भोपाल में नगर निगम का अतिक्रमण अधिकारी राजस्व मंत्री की उमाशंकर गुप्ता की मांग के बाद भी महिला के पेट पर लात मारने के बावजूद सस्पेंड तक नहीं किया जाता जबकि सरकार और संगठन मातृ शक्ति की पूजा करते-करते थकती नहीं है।  यह सब वैसे ही जैसे सीएम सर से पानी ऊपर होने पर बिगड़ैल अफसरों को ठीक करने एक साल से डंडा लेकर निकले हैैं। लेकिन पिछले दिनों दो लापरवाह प्रमुख सचिवों को नोटिस देने के उनके ही हुक्म की तामील नहीं हुई। इस पर वे तिलमिलाए और मुख्य सचिव से बोले - मेरे ही निर्देश पर अमल नहीं होगा तो कैसे चलेगा? बड़ा गंभीर सवाल है। लेकिन मुख्यमंत्री ने बड़ा दिल करते हुये अपनी कमजोर कड़ी सबके सामने रख दी। जनता से वे सीधा और साफ संवाद करते हैैं, उसके पुजारी हैैं तो उन्होंने अपने भगवान के सामने अपनी ही जांघ उघाड़ कर  रख दी। वैसे भगवान तो कई वर्षों से अपने पुजारी से यही रोना रो रहे हैैं कि ये नामुराद भ्रष्ट कर्मचारी-अफसर सुनते ही नहीं है, इन्हें ठीक करो। ऐसे में मुख्यमंत्री की लाचारी के लिये भी कोई अच्छा सा शब्द ढूंढना पड़ेगा।  इसी तरह 13 वर्ष पहले 2003 तक दिग्विजय काल में नाफरमान हो गई थी नौकरशाही।  साथ में बीएसपी यानी बिजली,  सड़क, पानी का भी संकट था। अब शिवकाल में बीएसपी के मुद्दे पर अलबत्ता थोड़ी राहत है। व्यापमं महाघोटाले के बाद कटनी हवाला कांड, खंडवा के बाद भोपाल सिमी आतंकियों का जेल तोड़ों कांड, फिर उनका एनकाउंटर और उसके बाद सबको हिला देने वाले पाकिस्तान व आतंकी संगठन आईएसआई के लिये काम करने 11 युवकों की गेंग के साथ आयशा नामक युवती का पकड़ा जाना बहुत ही गंभीर विषय है।

वादों पर अमल करने के लिये हम समंदर पार अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कामकाज से सबक ले सकते हैैं जिन्होंने सरकार में किसी की परवाह किये बिना अपने वादों पर अमल की शुरूआत करते हुये चीन को तेवर दिखाये, विदेशी घुसपैठियों को रोकने के लिये मैक्सिको को हड़़काया और आतंकी देशों की पहचान कर उनके नागरिकों को यूएसए में आने पर रोक लगा दी। ट्रम्प को पता है कि जनता ने उन्हें यही सब करने के लिये जनादेश दिया था और उन्हें इसी पर खरा उतरना है। मोदी सरकार से लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के सामने अभी चुनाव में दो साल का वक्त है, वे जनता से किये अपने गुड गवर्नेंस, करप्शन में जीरो टोलरेंस और नादियों से रेत और पहाड़ों से अवैध उत्खनन से लेकर महिलाओं की इज्जत बचाने और अस्पताल में इलाज के साथ स्कूल कालेजों में पढ़ाई कराने के वादों पर अमल करा सकते हैैं।(लेखक आईएनडी 24 के समूह प्रबंध संपादक हैं)

 

Dakhal News 13 February 2017

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