अग्नि-5 की उड़ान ,चीन परेशान
अग्नि-5 की उड़ान

अनुराग उपाध्याय 

आधी दुनिया अग्नि-5 की जद में है। अग्नि-5 का परिक्षण हुआ तो इसे चीन पर निशाना माना गया। भारत की इस ताकत का अंदाज चीन को है ,यही वजह है कि चीन की तरफ से बयान आया कि ''भारत और चीन प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझीदार हैं।'' चीन से भारत के रिश्ते जगजाहिर हैं ऐसे में मान्यता है कि अत्याधुनिक अस्त्र-शस्त्र व परमाणु शक्ति संपन्नता युद्ध टालने का सबब बनती है। तर्क दिया जाता है कि भारत-पाक के बीच चरम तनाव के बाद युद्ध का टलना दोनों देशों का परमाणु शक्ति संपन्न होना ही है। 

शायद यही वजह है कि सोमवार को सफलतापूर्वक छोड़ी गई भारत की इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-पांच को भारत ने शांति अस्त्र नाम दिया है। यह हमारे मिसाइल वैज्ञानिकों की बड़ी कामयाबी है। लगभग छह हजार किलोमीटर तक मारक क्षमता रखने वाली मिसाइल चीन की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। अब तक की कम दूरी की मारक अग्नि परिवार की एक, दो, तीन, चार तथा धनुष व पृथ्वी मिसाइलें पाकिस्तान की चुनौती के मुकाबले को ध्यान में रखकर तैयार की गई थीं। अब एशिया व यूरोप इस मिसाइल के दायरे में होंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह मिसाइल परमाणु शस्त्र ले जाने में सक्षम है और शत्रु की पकड़ में आने से बचने के लिए उन्नत तकनीक से लैस है। डिफेंस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन यानी डीआरडीओ द्वारा तैयार मिसाइल 85 फीसदी स्वदेशी है। सतह से सतह में मार करने वाली इस मिसाइल के सफल प्रक्षेपण के बाद भारत सुपर एक्सक्लूसिव क्लब में शामिल हो गया है, जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस व रूस जैसे देश शामिल हैं।

अग्नि -5 की उड़ान के बाद चीन ने  उम्मीद जताई कि भारत द्वारा परमाणु क्षमता से लैस अंतर द्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि पांच का परीक्षण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के नियमों के मुताबिक है और इससे दक्षिण एशिया का सामरिक संतुलन नहीं गड़बड़ाएगा और साथ ही कहा कि दोनों देश ‘प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझीदार’ हैं। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि हमारा हमेशा मानना है कि दक्षिण चीन सागर में सामरिक संतुलन और स्थिरता बनाए रखना क्षेत्र में शांति और समृद्धि के लिए अनुकूल है। दक्षिण एशिया में सामरिक संतुलन का तात्पर्य भारत और पाकिस्तान के सैन्य संतुलन से है। पांच हजार किलोमीटर रेंज वाले अंतर द्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) को चीन पर लक्षित सामरिक मिसाइल माना जाता है क्योंकि यह चीन के लगभग हर हिस्से में पहुंच सकता है। हुआ ने अग्नि पांच का निशाना चीन को बताते हुए भारत और अन्य जगहों पर की गई मीडिया रिपोर्ट की आलोचना की। उन्होंने कहा कि भारत के परीक्षण पर हमने गौर किया कि कुछ मीडिया जिसमें भारतीय मीडिया और जापानी मीडिया भी शामिल है, उन्होंने कयास लगाया कि यह चीन को लक्ष्य बनाकर किया गया है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि भारत की मंशा के बारे में आप भारतीय पक्ष से पूछिए। उन्होंने कहा कि भारत और चीन प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझीदार हैं।

ध्यान रहे कि भारत इसी साल 35 देशों वाले मिसाइल टेक्नॉलाजी कंट्रोल रिजीम यानी एमटीसीआर ग्रुप में शामिल हुआ है। दरअसल एमटीसीआर मानवरहित परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइलों की निगरानी करता है। भारत पहले ही सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस से लैस है। कुछ समय बाद अग्नि-पांच को भारतीय सेना में शामिल कर लिया जायेगा। हालांकि अभी अग्नि-छह का परीक्षण प्रारंभिक दौर में है। यद्यपि डीआरडीओ अग्नि-पांच को पांच हजार आठ सौ किलोमीटर तक सटीक मारक क्षमता वाला अस्त्र बता रहा है, वहीं चीनी विशेषज्ञों का मानना है कि अग्नि-पांच की क्षमता आठ हजार किलोमीटर तक है। 

कुलमिलाकर अग्नि-पांच का सफल परीक्षण जहां देश के वैज्ञानिकों की मेधा को प्रतिस्थापित करता है, वहीं क्षेत्र में शक्ति संतुलन कायम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस उपलब्धि पर हर कोई भारतीय गर्व कर सकता है कि हमने यह लक्ष्य स्वदेशी तकनीक और भारतीय वैज्ञानिकों की प्रतिभा से हासिल किया। नि:संदेह इस परीक्षण से भारत की मिसाइल शक्ति में वृद्धि ही हुई है। जब यह सेना में शामिल होगी तो सेना का मनोबल भी बढ़ेगा। वक्त के साथ अब परंपरागत युद्ध का स्थान आधुनिक तकनीक व परमाणु शक्ति ने ले लिया है। हम अपनी संप्रभुता व स्वतंत्रता की रक्षा तभी कर पायेंगे जब उन्नत अस्त्र-शस्त्रों से लैस होंगे। 

Dakhal News 27 December 2016

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