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अनुराग उपाध्याय
प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी की घोषणा के समाय और उसके बाद जो कुछ कहा था ,नतीजे वैसे नहीं आये हैं। कालाधन कहाँ गया इसका पता नहीं चला और जो कालाधन जिन लोगों के पास था वो भी नए नोटों में तब्दील हो गया है। आयकर विभाग और पुलिस की छापेमारी में पुराने के साथ नए नोटों की बरामदगी का सिलसिला सरकार के इस दावे की पोल खोलने वाला है कि नोटबंदी के चलते बड़े नोटों की शक्ल में मौजूद काला धन कागज का टुकड़ा बनकर रह जाएगा। दरअसल सरकार का यह दावा उसी समय कमजोर पड़ गया था जब वह काले धन वालों को एक और मौका देने के लिए आयकर कानून में संशोधन लेकर आ गई थी।
सरकार को यह कदम इसलिए उठाना पड़ा, क्योंकि उसे यह आशंका थी कि काले धन को बड़े पैमाने पर नष्ट करने का काम किया जाएगा। ऐसा कुछ होने के बजाय बड़ी मात्रा में काला धन येन-केन-प्रकारेण सफेद होता दिख रहा है। इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि आयकर विभाग और पुलिस की छापेमारी में लाखों-करोड़ों रुपये के नए-पुराने नोट मिल रहे हैं, क्योंकि यह बरामदगी कुल रकम का एक मामूली हिस्सा भर जान पड़ रही है।
ऐसा कोई दावा सही नहीं होगा कि आयकर विभाग अथवा पुलिस हर उस ठिकाने तक पहुंचने में सफल है जहां काला धन छिपाकर रखा गया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि छापेमारी में बड़ी मात्रा में दो हजार के नए नोट भी बरामद हो रहे हैं। इसका सीधा अर्थ है कि भ्रष्ट बैंक कर्मी काले धन वालों का काम आसान करने में लगे हुए हैं।
एक अनुमान के तहत अब तक करीब एक अरब रुपये के नए नोटों की बरामदगी हो चुकी है। हैरत नहीं कि भ्रष्ट बैंक कर्मियों ने इससे कई गुना अधिक राशि के नए नोट काले धन के कारोबारियों तक पहुंचाए हों। वैसे भी इस तरह की चर्चाएं जोरों पर हैं कि भ्रष्ट नेताओं, नौैकरशाहों और उद्योगपतियों ने भ्रष्ट बैंक अफसरों से साठगांठ कर या फिर 20-30 प्रतिशत कमीशन देकर अपने काले धन को सफेद कर लिया।
इन चर्चाओं को खारिज किया जा सकता है, लेकिन इस तथ्य की अनदेखी नहीं की जा सकती कि अनुमान से कहीं अधिक धन बैंकों में जमा हो चुका है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि काले धन का जखीरा कहां गया?
काले धन वालों के पास बड़ी राशि में दो हजार के नए नोट पहुंचना सरकार और साथ ही आम जनता से धोखाधड़ी के अलावा और कुछ नहीं।
यह शर्मनाक है कि जब आम जनता को अपनी जरूरत के दस-बीस हजार रुपये निकालने के लिए बैंकों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं तब संदिग्ध किस्म के लोगों के पास बीस-तीस-पचास लाख और किसी-किसी के पास तो एक-दो करोड़ से ज्यादा राशि के नए नोट मिल रहे हैं। यह मानने के अच्छे-भले कारण हैं कि भ्रष्ट बैंक अफसरों की हेराफेरी के कारण ही बड़ी संख्या में एटीएम खाली पड़े हैं और बैंकों में आवश्यकता से कहीं कम नकदी पहुंच रही है।
इस छल-कपट को हर हाल में रोकना होगा, अन्यथा आम लोग खुद को ठगा हुआ महसूस करेंगे। सरकार और साथ ही बैंकों की साख बचाए रखने के लिए भ्रष्ट बैंक कर्मियों और साथ ही काले धन के कारोबारियों पर कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिए। अभी तो सरकार डाल-डाल और वे पात-पात दिख रहे हैं। सरकार और उसके नीति-नियंताओं को इसका अहसास होना चाहिए कि 30 दिसंबर की तिथि करीब आ गई है।
जरूरी केवल यह नहीं है कि आम जनता को यह भरोसा दिलाया जाए कि जल्द हालात सामान्य होते दिखेंगे, बल्कि यह भी है कि ऐसे कदम उठाए जाएं जिससे यह आश्वासन हर हाल में पूरा होते हुए दिखे।लेकिन जिस तरह के हालात बने हुए हैं उससे लगता नही है कि सब कुछ बहुत जल्द सामान्य हो जाएगा।
हर दिन छापे और उसके बाद मिलने वाला धन साबित करता है कि नोटबंदी के बाद भी नोटों की हेराफेरी जारी हैं।
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