
Dakhal News

अरुण पटेल
कालेधन कुबेरों एवं बेनामी सम्पत्ति वालों के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी से लेकर बेनामी सम्पत्ति का पता लगाने का जो अभियान छेड़ा है उससे उत्साहित होकर मध्यप्रदेश के राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने बेनामी सम्पत्ति रखने वाले लोगों की प्रदेश में घेराबंदी करने के लिए जो चक्रव्यूह रचा है उसमें कहीं स्वयं “उमाशंकर’’ ही तो उलझ कर नहीं रह जायेंगे। यह सवाल इसलिए उठना स्वाभाविक है क्योंकि बेनामी सम्पत्ति रखने वालों में जैसी कि आम धारणा है, राजनेता और आला अधिकारियों की भरमार है। चूंकि पिछले 13 साल से प्रदेश में भाजपा की सरकार है इसलिए इस बात की आशंका है कि कहीं ऐसा करने वालों की सूची में उनके अपने साथी-संगी, जो सरकार व संगठन में उनसे अधिक रसूखदार हैं, वे जब अपने को फंसता देखेंगे तो कहीं ऐसा न हो कि उमाशंकर को ही सब मिलकर चक्रव्यूह में उलझा दें और उसका राजनीतिक खामियाजा उनको भुगतना पड़े। वैसे पहल करना साहसिक है और कांग्रेस ने इस पहल का स्वागत भी कर दिया है। विधानसभा का शीतकालीन छोटा सत्र 5 दिसम्बर से प्रारंभ होने जा रहा है और कार्यवाहक नेता प्रतिपक्ष बाला बच्चन के सामने अपनी छवि निखारने और अपने को सरकार पर धारदार हमला करने वाले महारथी के रूप में साबित करने का यह संभवत: अंतिम अवसर होगा। क्योंकि हो सकता है बजट सत्र के पूर्व तक कांग्रेस आलाकमान कोई स्थायी नेता प्रतिपक्ष के रूप में किसी नेता की तलाश कर ले जो अभी तक नहीं कर पाया है।
मध्यप्रदेश में शायद अब बेनामी सम्पत्ति रखने वालों पर गाज गिरने वाली है क्योंकि राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को पत्र लिखकर ऐसी सम्पत्तियों का ब्यौरा तलाश करने को कहा है। उल्लेखनीय है कि बेनामी सम्पत्ति रखने वालों में आमतौर पर नौकरशाह, राजनेता और बड़े-बड़े कारोबारी शामिल होते हैं। यह सम्पत्तियां बड़े शहरों के आसपास राजमार्गों व राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों ओर और बायपास के किनारे ही नहीं बल्कि छोटे शहरों व ग्रामीण इलाकों में भी फैली हुई हैं क्योंकि सोने के अलावा जमीनों में निवेश भी एक सुरक्षित जरिया माना जाता रहा है। जमीन के दामों में बेतहाशा वृद्धि से फायदे की अधिक गुंजाइश रहती है इसलिए बेनामी सम्पत्ति का चलन बढ़ रहा है। सामान्यतया बेनामी सम्पत्तियां स्वयं के नाम पर कम नाते-रिश्तेदारों व नौकर-चाकरों के नाम पर ही होती हैं। ऐसे में जब अभियान चलेगा तो अधिकांश असरदार लोग ही इसकी चपेट में आयेंगे। एक-एक आदमी के कई बंगले, जमीन और फार्म हाउस हैं। संसद में तीन दिन पूर्व ही बेनामी ट्रांजेक्शन एक्ट 2016 लाया गया है, केन्द्र सरकार जल्द ही नोटीफिकेशन भी करने वाली है। जिन लोगों ने 30 सितम्बर 2016 तक आय की घोषणा में इन सम्पत्तियों का ब्योरा दे दिया होगा, हो सकता है कि वे बच निकलें, लेकिन फिर भी बड़ी संख्या में लोगों के इसके चपेट में आने की संभावना है।
श्री गुप्ता ने जो पहल की है उसने संभवत: ताजे संदर्भों में मध्यप्रदेश को देश के ऐसे अग्रणी राज्यों में लाकर खड़ा कर दिया है जहां इस प्रकार की कार्रवाई में त्वरित गति दिखाई गई हो। वैसे गुप्ता जुझारू प्रवृत्ति के हैं और एक बार जो ठान लेते हैं उसमें कभी झुकते नहीं हैं और उन्हें जो सही लगता है वह बिना किसी दबाव में आये करते रहे हैं। जब प्रदेश में पहली बार वे राज्यमंत्री बने और परिवहन विभाग का स्वतंत्र प्रभार मिला तब उन्होंने कुछ दिन बाद कहा था कि वे विभाग में इतनी पारदर्शिता व कसावट लायेंगे कि इसे जो लोग मलाईदार विभाग मानकर प्रतिनियुक्ति में आने के लिए लाईन लगाए रहते हैं वे यहां से जाने के ज्यादा इच्छुक होंगे। गुप्ता तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के समय परिवहन राज्यमंत्री थे और उन्होंने पुलिस से परिवहन विभाग में प्रतिनियुक्ति पर रोक लगा दी थी। पुलिस अधिकारी इस विभाग में लक्ष्मी की झमाझम खनक होने के कारण प्रतिनियुक्ति पर आने के लिए लालायित रहते थे। भोपाल में जब स्मार्ट सिटी के रूप में शिवाजी नगर का चयन हुआ, जो कि दिल्ली की तरह भोपाल का लुटियन झोन कहा जाता है, उसे बचाने के लिए बड़े पैमाने पर लोगों के सुर जब मुखरित हुए तब गुप्ता एकमात्र ऐसे मंत्री थे जो सरकार के निर्णय की पहल के विरुद्ध खड़े नजर आये और उनके दबाव और जन-दबाव के चलते ही सरकार को अपना निर्णय बदलना पड़ा। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि गुप्ता जो ठान लेते हैं उसे अमलीजामा पहनाते समय किसी दबाव में नहीं आते। वैसे गुप्ता के स्वभाव को देखते हुए कांग्रेस ने उनकी पहल का स्वागत करने में एक क्षण की भी देरी नहीं की। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता के.के. मिश्रा ने कहा कि राजस्व मंत्री ने समूचे प्रदेश में बेनामी सम्पत्तियों की खरीदी की जानकारी जिला कलेक्टरों को हासिल किए जाने हेतु जो आदेश दिया है वह अनुकरणीय और स्वागतयोग्य है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी आग्रह किया कि पिछले 10 वर्षों में राजधानी भोपाल, इंदौर, सीहोर, विदिशा और होशंगाबाद जिलों में बायपास और रिंग रोड के आसपास की बेशकीमती भ्ाूमि/सम्पत्तियां किन-किन प्रभावशाली परिवारों ने खरीदी हैं उनके नामों की भी जानकारी जुटाकर सार्वजनिक करें।
विधानसभा का शीतकालीन सत्र 5 दिसम्बर से प्रारंभ होने जा रहा है और इसमें सत्तापक्ष और विपक्ष “तू डाल-डाल तो मैं पात-पात’’ की नीति पर चल सकते हैं। दोनों ही एक-दूसरे पर बढ़त लेने की हरसंभव कोशिश करेंगे जिससे सत्र के हंगामादार होने की संभावना है। जहां तक सत्तापक्ष का सवाल है तो वह अत्यधिक उत्साहित है क्योंकि शहडोल लोकसभा और नेपानगर विधानसभा का उपचुनाव उसने जीता है और इस जीत के सहारे वह प्रतिपक्षी दल कांग्रेस को आईना दिखाने की भरपूर कोशिश करेगा तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस भी जोरशोर से सरकार की घेराबंदी में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखेगी। भाजपा जहां नोटबंदी को अपनी उपलब्धि बतायेगी तो वहीं दूसरी ओर इससे होने वाली परेशानी को लेकर कांग्रेस उसे घेरने में अपनी पूरी ताकत लगायेगी। किसानों को होने वाली परेशानियों को विशेष रूप से उभारा जायेगा क्योंकि किसान इन दिनों काफी परेशान हैं। आरोपों की झड़ी लगाते हुए कांग्रेस यह बताने की कोशिश करेगी कि वह एक जागरुक विपक्षी दल है, तो जो चुनावी नतीजे आये हैं उसके परिप्रेक्ष्य में उसके हमलों की धार को सत्तापक्ष यह कहते हुए बोथरा करने की कोशिश करेगा कि प्रदेश की जनता कांग्रेस को लगातार नकार रही है। प्रभारी नेता प्रतिपक्ष के रूप में इस मौके का कितना फायदा बाला बच्चन उठा पाते हैं यह देखने की बात होगी। फिलहाल नेता प्रतिपक्ष का मामला टाल कर कांग्रेस आला कमान ने यह संकेत दे दिया है कि उसकी प्राथमिकता सूची में अभी मध्यप्रदेश नहीं है। यह इस बात की गारंटी भी नहीं है कि बतौर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव को पूरी तरह आलाकमान से अभयदान मिल गया है। अनिर्णय की स्थिति में केवल यही संकेत छिपा है कि कांग्रेस अब जो भी परिवर्तन करना चाहती है वह 2018 के विधानसभा चुनाव को नजर में रखते एकमुश्त करेगी यानी वह उन चेहरों को तरजीह देगी जो उसके हिसाब से बेहतर नतीजे देने वाले होंगे। बाला बच्चन यदि इस सत्र में कुछ प्रभाव छोड़ने में सफल रहते हैं तो उनका दावा मजबूत हो सकता है क्योंकि इससे पूर्व बतौर प्रभारी प्रतिपक्ष के नेता वे कोई विशेष प्रभाव नहीं छोड़ पाये थे। [लेखक सुबह सवेरे के प्रबंध संपादक हैं।]
Dakhal News
All Rights Reserved © 2025 Dakhal News.
Created By:
![]() |