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एक साल में 13 बाघ मारे गए मध्य प्रदेश के अभयारण्यों में
मध्य प्रदेश के दो राष्ट्रीय उद्यानों में पिछले एक साल में विषाक्तता, बिजली का झटका लगने और दूसरे कई कारणों से कम से कम 13 बाघ मर चुके हैं। राज्य वन विभाग ने एक RTI का जवाब देते हुए बताया कि पेंच राष्ट्रीय उद्यान में नौ बाघों की मौत हो गयी जबकि बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में चार बाघ मारे गए। पेंच उद्यान को मोगली के घर के तौर पर जाना जाता है जो अंग्रेज लेखक रुडयार्ड किपलिंग के फिक्शन उपन्यास 'जंगल बुक' का मुख्य किरदार है।
राज्य के राष्ट्रीय उद्यानों में बाघों के शिकार के मामलों की जांच की मांग को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर करने वाले वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने सूचना का अधिकार आवेदन देकर पिछले एक साल में मारे गए बाघों के ब्यौरे मांगे थे। वन विभाग ने विषाक्तता, बिजली का झटका लगना, बीमारी, दूसरे बाघों से लड़ाई और कुएं में डूबने को बाघों के मारे जाने की वजह बताया है।
मध्य प्रदेश में छह बाघ अभयारण्य हैं जिनमें कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना, बोरी-सतपुडा , संजय-दुबरी और पेंच शामिल हैं। इन अभयारण्यों में करीब 257 बाघ हैं। 2010 में देश में बाघों की आबादी 1,706 थी और 2014 में यह बढ़कर 2,226 हो गयी। बाघों की आबादी के लिहाज से कर्नाटक और उत्तराखंड के बाद मध्य प्रदेश तीसरे स्थान पर आता है। भारतीय वन्यजीव संरक्षण सोसायटी के आंकड़ों के मुताबिक साल 2016 में करीब 100 बाघों की मौत हो चुकी है। जिनमें से 36 बाघों को शिकार करने के लिए मारा गया है।
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