लाड़ली बहना योजना पर मोहन सरकार को हाईकोर्ट से राहत
  Relief for Mohan government from High Court regarding

 

मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट से सरकार को राहत मिली है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने योजना के वित्तीय प्रबंधन और बजट पर पड़ने वाले असर को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की पीठ ने स्पष्ट किया कि मुफ्त योजनाओं के वित्तीय प्रभाव से जुड़ा मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में उसी मुद्दे पर हाईकोर्ट में समानांतर सुनवाई करना उचित नहीं होगा। यह याचिका चंद्रशेखर साहू ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर की थी।

याचिकाकर्ता ने अदालत में तर्क दिया था कि लाड़ली बहना जैसी नियमित नकद हस्तांतरण योजनाओं को लागू करने या उनमें राशि बढ़ाने से पहले मध्य प्रदेश राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम, 2005 के प्रावधानों का पालन किया जाना जरूरी है। याचिका में मांग की गई थी कि सरकार योजना पर अगले पांच वर्षों में होने वाले खर्च का आकलन सार्वजनिक करे। इसके साथ ही राजस्व घाटे, राजकोषीय घाटे, सरकारी कर्ज और पूंजीगत परिसंपत्तियों के निर्माण पर पड़ने वाले प्रभाव का भी पूरा ब्योरा सामने रखने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने योजना का पारदर्शी ऑडिट कराने और उसकी नियमित समीक्षा के लिए एक व्यवस्था बनाने की अपील भी अदालत से की थी।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि मुफ्त योजनाओं के वित्तीय प्रभाव से जुड़ा व्यापक मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। अश्विनी कुमार उपाध्याय विरुद्ध भारत संघ सहित कई मामलों में इस मुद्दे पर विचार किया जा रहा है, इसलिए हाईकोर्ट ने अलग से हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। हालांकि, लाड़ली बहना योजना को लेकर सुधा दुबे की ओर से दायर एक अन्य जनहित याचिका पर हाईकोर्ट पहले ही नोटिस जारी कर चुका है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उनके स्वास्थ्य व पोषण स्तर में सुधार के उद्देश्य से यह योजना शुरू की थी। इसके तहत पात्र महिलाओं के आधार-लिंक और डीबीटी सक्रिय बैंक खातों में हर महीने 1,500 रुपये की राशि सीधे ट्रांसफर की जाती है।

Dakhal News 3 November 2026

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