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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली के व्यापारिक संगठनों की याचिका पर तत्काल आदेश देने से इनकार कर दिया। याचिका में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दिल्ली के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन के कारण कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि किसी के लिए प्रदर्शन करना जरूरी है, तो किसी के लिए मूंगफली बेचना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। अदालत ने उम्मीद जताई कि सभी पक्ष समझदारी से काम लेंगे। प्रदर्शन को देखते हुए नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) ने सेंट्रल पार्क बंद करने का आदेश दिया है। व्यापारियों का दावा है कि इससे कनॉट प्लेस और आसपास के बाजारों में रोजाना करीब 200 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है।
यह याचिका दिल्ली किराना कमेटी और दिल्ली आयरन एंड हार्डवेयर मर्चेंट एसोसिएशन की ओर से दायर की गई थी। व्यापारिक संगठनों ने अदालत में कहा कि त्योहारों और शादी के सीजन में प्रदर्शन के कारण दुकानदारों, ठेले वालों और छोटे कारोबारियों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। याचिका में यह भी दावा किया गया कि 10 अक्टूबर से जारी प्रदर्शनों के चलते व्यापारियों को करीब 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। अदालत ने छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी से जुड़ी मुश्किलों का जिक्र करते हुए कहा कि इन परिस्थितियों में सभी पक्षों को बेहतर समझदारी दिखानी चाहिए। हालांकि, अदालत ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए प्रदर्शन पर रोक लगाने का आदेश नहीं दिया।
दरअसल, CJP ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन को रोक दिया था और पार्टी के शीर्ष नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिया था। मजिस्ट्रेट अदालत ने तीनों को रिहा करने का आदेश दिया था और वे करीब 23 घंटे पुलिस हिरासत में रहे। इस दौरान अन्य राजनीतिक नेताओं और लोगों को भी हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई थी। प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम के बीच अब मामला कारोबार, सार्वजनिक व्यवस्था और प्रदर्शन के अधिकार के बीच संतुलन को लेकर चर्चा में है।
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