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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के मिसरोद थाना क्षेत्र में जनजातीय विद्यार्थियों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। गोंड समाज महासभा ने इस मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। महासभा के प्रदेश अध्यक्ष युवा प्रकोष्ठ जेएस धुर्वे ने नरसिंहपुर कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के नाम ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि 13 अक्टूबर को गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान ‘जय जोहार’ अभियान पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई और प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पुलिस वाहन में बैठाकर ले जाया गया।
इस मामले में मिसरोद के तत्कालीन थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार पर छात्रों के साथ अभद्र व्यवहार करने और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप लगे हैं। घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद विभिन्न संगठनों ने विरोध जताया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी को निलंबित कर जांच के आदेश दिए गए। राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल के मुताबिक, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जांच में यदि अन्य पुलिसकर्मी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
गोंड समाज महासभा ने मांग की है कि घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और पुलिस रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके। संगठन ने हिरासत में लेने की प्रक्रिया की वैधानिकता की जांच करने और आरोप प्रमाणित होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है। महासभा का कहना है कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है और जांच के आधार पर एफआईआर दर्ज करने पर भी विचार किया जाना चाहिए। साथ ही, पुलिसकर्मियों को जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाने की मांग उठाई गई है। अब इस मामले में जांच के निष्कर्ष और आगे होने वाली कार्रवाई पर सबकी नजर है।
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