छत्तीसगढ़ को मिलेगी पहली राजकीय तितली 3 प्रजातियां रेस में
  Chhattisgarh to get its first state butterfly; 3 species in the running.

 

छत्तीसगढ़ अब अपनी जैव विविधता को एक नई पहचान देने की तैयारी में है। प्रदेश में पहली बार राजकीय तितली चुनने की प्रक्रिया शुरू की गई है। वन विभाग ने इसके लिए कॉमन बैंडेड पीकॉक, ऑरेंज ओकलीफ और स्पॉट स्वॉर्डटेल को अंतिम सूची में रखा है। इनके चयन में प्रदेश में उपलब्धता, पर्यावरणीय भूमिका, संरक्षण की जरूरत, विशिष्टता और लोगों के बीच आकर्षण जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा। राज्य में 2019 से 2024 के बीच सभी 33 जिलों में किए गए सर्वे के दौरान अब तक 201 तितली प्रजातियों की पहचान की जा चुकी है, जिनमें 19 ऐसी प्रजातियां हैं जो पहले प्रदेश के रिकॉर्ड में शामिल नहीं थीं।

बस्तर क्षेत्र में तितलियों की विविधता विशेष रूप से देखने को मिलती है। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में 252 से अधिक प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। यहां जंगल, जलस्रोत, घास के मैदान और विभिन्न प्रकार की वनस्पतियां तितलियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती हैं। कुछ इलाकों में एक ही स्थान पर 100 से ज्यादा प्रजातियां देखी जा सकती हैं। कॉमन जेम, ऑरेंज ओकलीफ, ब्लू टाइगर, प्लेन टाइगर और कॉमन मैप जैसी प्रजातियां यहां पाई जाती हैं। अक्टूबर से फरवरी के बीच इनकी गतिविधियां अधिक दिखाई देती हैं, जिससे क्षेत्र में प्रकृति और वन्यजीव पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं।

प्रदेश में तितलियों की संख्या और विविधता सामने आने के साथ इनके प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखने की चुनौती भी महत्वपूर्ण हो गई है। राज्य में पहले 182 प्रजातियों का रिकॉर्ड था, लेकिन व्यापक सर्वे के बाद इसमें 19 नई प्रजातियां जुड़कर आंकड़ा 201 तक पहुंच गया। राजकीय तितली का चयन केवल किसी एक प्रजाति को पहचान देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे जुड़े जंगलों, वनस्पतियों और अन्य प्राकृतिक आवासों के संरक्षण पर भी ध्यान बढ़ सकता है। तितलियों की मौजूदगी स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत मानी जाती है, इसलिए इनके संरक्षण से छत्तीसगढ़ की जैव विविधता को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

 

Dakhal News 8 October 2026

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