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मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में करीब 24,500 करोड़ रुपये के विभिन्न प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक के फैसलों की जानकारी मंत्री चैतन्य कश्यप ने दी। उन्होंने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग ने अभियान चलाकर 900 से ज्यादा लंबित अनुकंपा नियुक्तियों की प्रक्रिया पूरी कर ली है और अन्य विभागों को भी लंबित मामलों का जल्द निराकरण करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं भोपाल मास्टर प्लान-2047 का ड्राफ्ट जारी कर आम लोगों से सुझाव मांगे गए हैं। यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल भारत के 78 स्थलों में मध्यप्रदेश के 19 ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थल भी शामिल हैं।
कैबिनेट ने विमुक्त, घुमंतू और अर्ध घुमंतू वर्ग के छात्रावासों व संबंधित संस्थानों को एक रुपये प्रति किलो की दर से अनाज उपलब्ध कराने का फैसला लिया है। इसके अलावा सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए कई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। दतिया की मां रतनगढ़ सिंचाई परियोजना के लिए 1,608 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिससे 78,484 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित करने का लक्ष्य है। रामपुरा-मनासा माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजना के लिए 524 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है, जिससे 65,400 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलने की योजना है। साथ ही कोर्ट भवनों के निर्माण के लिए 651 करोड़ और हेल्थ सेंटरों के लिए 3,113 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
उज्जैन की खान डायवर्सन योजना के तहत क्षिप्रा नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए बनाई जा रही 30 किलोमीटर लंबी टनल का 51 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। वहीं सागर सिंचाई परियोजना के लिए 1,052 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, जिसके जरिए 80,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य है। सरकार के मुताबिक इन परियोजनाओं से सिंचाई का दायरा बढ़ाने के साथ किसानों को लाभ मिलेगा। इसके साथ ही न्यायिक और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भी काम आगे बढ़ेगा।
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