E-20 पेट्रोल पर बढ़ी चिंता, पुराने वाहनों में फ्यूल सिस्टम की शिकायतें बढ़ीं
इथेनॉल मिश्रित E-20 पेट्रोल को लेकर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पुराने वाहनों के मालिकों की शिकायतें बढ़ने लगी हैं। शहर के कई कार और बाइक सर्विस सेंटरों के अनुसार, जून-जुलाई के दौरान 5 से 7 साल पुराने वाहनों में कार्बोरेटर, फ्यूल फिल्टर, फ्यूल पंप, इंजेक्टर और रबर पाइप से जुड़ी समस्याओं में बढ़ोतरी देखी गई है। कुछ सर्विस सेंटरों का दावा है कि पहले की तुलना में सर्विस के लिए आने वाले वाहनों की संख्या लगभग 20% बढ़ गई है, हालांकि नए मॉडल के वाहनों में ऐसी दिक्कतें लगभग नहीं के बराबर हैं।
वहीं, विशेषज्ञ और वाहन कंपनियां E-20 पेट्रोल को इन खराबियों का सीधा कारण मानने से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2023-24 के बाद आने वाले अधिकांश वाहन E-20 के अनुरूप बनाए गए हैं और पुराने वाहनों में आने वाली समस्याएं समय पर सर्विसिंग न होने, सामान्य घिसावट और रखरखाव की कमी से भी जुड़ी हो सकती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, अब तक ऐसी कोई प्रमाणित वैज्ञानिक स्टडी सामने नहीं आई है जो यह साबित करे कि E-20 पेट्रोल से पुराने वाहनों के इंजन या पुर्जों को सीधे नुकसान पहुंचता है, हालांकि इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता कम होने के कारण माइलेज पर कुछ असर पड़ सकता है।