Patrakar Priyanshi Chaturvedi
मध्यप्रदेश सरकार ने शासकीय कर्मचारियों की लंबे समय से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए मप्र लोकसेवा पदोन्नति नियम-2025 के तहत नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने विभागाध्यक्षों को एक सप्ताह के भीतर कैडरवार और एकमुश्त वरिष्ठता सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का अनुमान है कि पदोन्नति प्रक्रिया पूरी होने से करीब 4.50 लाख शासकीय कर्मचारियों को लाभ मिलेगा और उनके पदोन्नत होने से खाली होने वाले लगभग 2 लाख पदों पर नई भर्तियों का रास्ता भी खुलेगा।
नई व्यवस्था के तहत पदोन्नति में केवल वरिष्ठता ही नहीं, बल्कि मेरिट (योग्यता) और सेवा अभिलेख को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया जाएगा। अधिकारियों के लिए मेरिट-कम-सीनियरिटी, जबकि निचले स्तर के कर्मचारियों के लिए सीनियरिटी-कम-मैरिट का सिद्धांत लागू होगा। पदोन्नति के लिए गोपनीय प्रतिवेदन (ACR/APAR) अहम रहेगा, हालांकि यदि रिकॉर्ड उपलब्ध न होने की जिम्मेदारी विभाग की होगी तो कर्मचारी को इसका नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। केवल कारण बताओ नोटिस के आधार पर पदोन्नति नहीं रोकी जाएगी और प्रतिनियुक्ति पर गए कर्मचारियों के कारण भी पदोन्नति प्रक्रिया नहीं रुकेगी।
पदोन्नति प्रक्रिया में आरक्षण नियमों का भी पालन किया जाएगा। रिक्त पदों में 16 प्रतिशत अनुसूचित जाति (SC) और 20 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए आरक्षित होंगे, जबकि शेष पदों पर सभी पात्र कर्मचारी, जिनमें आरक्षित वर्ग के कर्मचारी भी शामिल होंगे, प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। हालांकि नए नियमों को लेकर कुछ कर्मचारी संगठनों ने विरोध भी दर्ज कराया है और आरक्षण व्यवस्था को लेकर आपत्तियां उठाई हैं। सरकार का कहना है कि संभावित कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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