बंगाल विधानसभा में एंटी-गुंडा और OBC आरक्षण बिल पास, अगस्त में पेश होगा UCC विधेयक
पश्चिम बंगाल विधानसभा ने कानून-व्यवस्था और आरक्षण से जुड़े चार महत्वपूर्ण विधेयकों को मंजूरी दे दी है। इनमें एंटी-गुंडा कानून के तहत पुलिस और जिला प्रशासन को सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा माने जाने वाले व्यक्तियों को कुछ मामलों में बिना ट्रायल के अधिकतम 12 महीने तक हिरासत में रखने का अधिकार मिलेगा। साथ ही दंगे या हिंसा के दौरान सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से मुआवजा वसूला जाएगा और जरूरत पड़ने पर उनकी संपत्ति जब्त कर नीलाम भी की जा सकेगी।
विधानसभा ने OBC आरक्षण से जुड़े दो संशोधन विधेयक भी पारित किए। कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश के बाद बिना सर्वेक्षण OBC सूची में शामिल किए गए 113 समुदायों को हटाया गया है, जबकि नए सर्वे के आधार पर 66 समुदायों को सूची में जोड़ा गया है। नए प्रावधान के तहत अलग-अलग श्रेणियों के बजाय केवल एक OBC श्रेणी रहेगी और आरक्षण का प्रतिशत 17 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत किया गया है। सरकार और पिछड़ा वर्ग आयोग भविष्य में आरक्षण का प्रतिशत तय करेंगे, जबकि कुल आरक्षण 50 प्रतिशत की संवैधानिक सीमा के भीतर रहेगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि समान नागरिक संहिता (UCC) का मसौदा 2 जुलाई को राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा और अगस्त में इसे विधानसभा में पेश करने की तैयारी है। UCC का प्रारूप तैयार करने के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति गठित की गई है, जिसे एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।